Farming Tips: हर साल गर्मी के मौसम में तापमान बढ़ते ही खेतों में आग लगने की घटनाएं अचानक बहुत ज्यादा बढ़ जाती हैं. अक्सर गेहूं की कटाई के बाद खेतों में बची सूखी नरवाई या डंठल में जरा सी चिंगारी लगते ही पूरी फसल और किसानों की सालभर की मेहनत मिनटों में खाक हो जाती है. ज्यादातर मामलों में यह आग किसी प्राकृतिक वजह से नहीं, बल्कि इंसानी लापरवाही और कुछ छोटी-मोटी गलतियों के कारण लगती है.
दोपहर के वक्त तेज गर्म हवाएं और लू इन चिंगारियों को भड़काने में घी का काम करती हैं जिससे आग देखते ही देखते बेकाबू होकर आसपास के गांवों तक फैल जाती है. इस समस्या से बचने के लिए किसानों को जागरूक होना और सही समय पर कुछ जरूरी कदम उठाना बेहद जरूरी है.
खेतों में आग लगने की ये बड़ी गलतियां
ज्यादातर मामलों में आग लगने की सबसे बड़ी वजह फसल कटाई के बाद बची हुई नरवाई या पराली को खेत में ही सीधे जलाना है. किसान खेत साफ करने के शॉर्टकट में आग तो लगा देते हैं लेकिन तेज हवा के कारण यह आसपास के खड़े खेतों तक पहुंच जाती है.
इसके अलावा खेतों के ऊपर से गुजरने वाले बिजली के ढीले तारों से निकलने वाली चिंगारी, कंबाइन हार्वेस्टर या ट्रैक्टर के साइलेंसर से निकलने वाला स्मोक और जलती हुई बीड़ी-सिगरेट को लापरवाही से फेंकना भी आग लगने की वजह बनता है.
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ऐसे रखें अपने खेतों का पूरा ध्यान
खेतों को इस भारी नुकसान से बचाने के लिए किसानों को नरवाई जलाने की आदत को पूरी तरह छोड़कर पूसा डीकंपोजर जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करना चाहिए. जो पराली को खेत में ही गलाकर खाद बना देती हैं. बिजली के ढीले तारों की शिकायत तुरंत विभाग से करें और कंबाइन हार्वेस्टर चलाते समय उसमें स्पार्क अरेस्टर और पानी की टंकी हमेशा साथ रखें.
सूखी फसलों के आसपास भूलकर भी बीड़ी-सिगरेट न पिएं और खेत के चारों तरफ एक खाली पट्टी या फायर लाइन बनाकर जुताई कर दें जिससे आग आगे न बढ़ पाए. अगर कभी अचानक आग लग भी जाए तो तुरंत फायर ब्रिगेड को फोन करने के साथ-साथ ट्रैक्टर-कल्टीवेटर से आग के चारों ओर की मिट्टी पलट दें जिससे उसे फैलने का रास्ता न मिले.
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