Wednesday, July 29, 2026
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किस जानवर है आपकी फसल को है सबसे ज्यादा खतरा, कैसे कर सकते हैं बचाव


देश के मैदानी इलाकों में नीलगाय फसलों की सबसे बड़ी दुश्मन बनी हुई है. यह झुंड में आती है और गेहूं, चना, सरसों और सब्जियों की हरी-भरी फसलों को मिनटों में खाकर बर्बाद कर देती है. केवल खाने से ही नहीं, बल्कि इनके भारी-भरकम शरीर से फसलें बुरी तरह कुचल जाती हैं. इनसे बचाव के लिए किसान भाइयों को सही वक्त पर ठोस इंतजाम करने बेहद जरूरी हैं.

देश के मैदानी इलाकों में नीलगाय फसलों की सबसे बड़ी दुश्मन बनी हुई है. यह झुंड में आती है और गेहूं, चना, सरसों और सब्जियों की हरी-भरी फसलों को मिनटों में खाकर बर्बाद कर देती है. केवल खाने से ही नहीं, बल्कि इनके भारी-भरकम शरीर से फसलें बुरी तरह कुचल जाती हैं. इनसे बचाव के लिए किसान भाइयों को सही वक्त पर ठोस इंतजाम करने बेहद जरूरी हैं.

जंगली सूअर रात के अंधेरे में खेतों पर हमला बोलते हैं और फसलों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुँचाते हैं. ये सिर्फ ऊपर से पत्तियों को नहीं खाते बल्कि अपनी मजबूत थूथन से जमीन खोदकर पौधों की जड़ें, आलू, मूंगफली और गन्ने को उखाड़ फेंकते हैं. एक ही रात में सूअरों का पूरा झुंड एकड़ के हिसाब से लहलहाती फसल को पूरी तरह तबाह कर सकता है.

जंगली सूअर रात के अंधेरे में खेतों पर हमला बोलते हैं और फसलों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुँचाते हैं. ये सिर्फ ऊपर से पत्तियों को नहीं खाते बल्कि अपनी मजबूत थूथन से जमीन खोदकर पौधों की जड़ें, आलू, मूंगफली और गन्ने को उखाड़ फेंकते हैं. एक ही रात में सूअरों का पूरा झुंड एकड़ के हिसाब से लहलहाती फसल को पूरी तरह तबाह कर सकता है.

आजकल गांवों और कस्बों के आसपास आवारा गाय और बैलों की संख्या काफी बढ़ गई है. यह छुट्टा पशु दिन हो या रात जब भी मौका मिलता है खेतों में घुस आते हैं. यह किसी भी मौसम की फसल को चर जाते हैं और पौधों को रौंद डालते हैं. अगर समय रहते खेत की घेराबंदी न की जाए, तो किसानों को लागत निकालना भी मुश्किल हो जाता है.

आजकल गांवों और कस्बों के आसपास आवारा गाय और बैलों की संख्या काफी बढ़ गई है. यह छुट्टा पशु दिन हो या रात जब भी मौका मिलता है खेतों में घुस आते हैं. यह किसी भी मौसम की फसल को चर जाते हैं और पौधों को रौंद डालते हैं. अगर समय रहते खेत की घेराबंदी न की जाए, तो किसानों को लागत निकालना भी मुश्किल हो जाता है.

जानवरों से फसल बचाने के लिए सोलर फेंसिंग यानी सौर ऊर्जा वाली बाड़ सबसे असरदार तरीका माना जाता है. इसमें तार के अंदर हल्का सा करंट दौड़ता है, जिससे जानवर को सिर्फ तेज झटका लगता है और वह डरकर भाग जाता है. इस करंट से जानवर को कोई नुकसान या जान का खतरा नहीं होता, लेकिन खेत सुरक्षित रहता है और सरकार भी इस पर सब्सिडी देती है.

जानवरों से फसल बचाने के लिए सोलर फेंसिंग यानी सौर ऊर्जा वाली बाड़ सबसे असरदार तरीका माना जाता है. इसमें तार के अंदर हल्का सा करंट दौड़ता है, जिससे जानवर को सिर्फ तेज झटका लगता है और वह डरकर भाग जाता है. इस करंट से जानवर को कोई नुकसान या जान का खतरा नहीं होता, लेकिन खेत सुरक्षित रहता है और सरकार भी इस पर सब्सिडी देती है.

अगर आप लंबे समय के लिए खेत को महफूज रखना चाहते हैं. तो चारों तरफ कंटीले तार या मजबूत लोहे की जाली लगवाएं. हालांकि, इसमें शुरुआत में थोड़ा खर्च ज्यादा आता है. लेकिन यह कई सालों तक छुट्टा मवेशियों और जंगली जानवरों को खेत में घुसने से रोकता है. तार के साथ मजबूत खंभे लगाएं ताकि भारी जानवर धक्का देकर बाड़ को तोड़ न सकें.

अगर आप लंबे समय के लिए खेत को महफूज रखना चाहते हैं. तो चारों तरफ कंटीले तार या मजबूत लोहे की जाली लगवाएं. हालांकि, इसमें शुरुआत में थोड़ा खर्च ज्यादा आता है. लेकिन यह कई सालों तक छुट्टा मवेशियों और जंगली जानवरों को खेत में घुसने से रोकता है. तार के साथ मजबूत खंभे लगाएं ताकि भारी जानवर धक्का देकर बाड़ को तोड़ न सकें.

नीलगाय और सूअरों की सूंघने की शक्ति बहुत तेज होती है. इसलिए वह बदबू से दूर भागते हैं. किसान नीम के तेल, छाछ, लहसुन और लाल मिर्च का घोल बनाकर फसल की सीमाओं पर छिड़क सकते हैं. इसके अलावा गोबर और गोमूत्र का गाढ़ा मिश्रण बनाकर खेत के किनारे छिड़कने से भी जानवर फसल के पास आने से कतराते हैं और रास्ता बदल लेते हैं.

नीलगाय और सूअरों की सूंघने की शक्ति बहुत तेज होती है. इसलिए वह बदबू से दूर भागते हैं. किसान नीम के तेल, छाछ, लहसुन और लाल मिर्च का घोल बनाकर फसल की सीमाओं पर छिड़क सकते हैं. इसके अलावा गोबर और गोमूत्र का गाढ़ा मिश्रण बनाकर खेत के किनारे छिड़कने से भी जानवर फसल के पास आने से कतराते हैं और रास्ता बदल लेते हैं.

जंगली जानवर अचानक होने वाले शोर और चमकदार रोशनी से बहुत घबराते हैं. खेतों में पटाखे फोड़ना, ढोल बजाना या टीन के डिब्बे टांगना पुराना पर असरदार तरीका है. इसके अलावा सोलर ब्लिंकर लाइटें या आतिशबाजी वाली साउंड मशीनें खेत के चारों कोनों पर लगाने से रात में सूअर और नीलगाय खेत के करीब भटकने की हिम्मत बिल्कुल नहीं करते हैं.

जंगली जानवर अचानक होने वाले शोर और चमकदार रोशनी से बहुत घबराते हैं. खेतों में पटाखे फोड़ना, ढोल बजाना या टीन के डिब्बे टांगना पुराना पर असरदार तरीका है. इसके अलावा सोलर ब्लिंकर लाइटें या आतिशबाजी वाली साउंड मशीनें खेत के चारों कोनों पर लगाने से रात में सूअर और नीलगाय खेत के करीब भटकने की हिम्मत बिल्कुल नहीं करते हैं.

खेत की बाउंड्री पर ऐसे पौधे लगाएं जिन्हें जानवर खाना पसंद नहीं करते जैसे करौंदा, नींबू, जेट्रोफा या मेंहदी. इसे बॉर्डर क्रॉपिंग कहते हैं. जब जानवर सीमा पर ही रुक जाते हैं, तो अंदर की मुख्य फसल सुरक्षित बची रहती है. साथ ही, हर साल बदलकर फसल बोने से भी जानवरों का ध्यान आपके खेत पर कम भटकता है और नुकसान कम होता है.

खेत की बाउंड्री पर ऐसे पौधे लगाएं जिन्हें जानवर खाना पसंद नहीं करते जैसे करौंदा, नींबू, जेट्रोफा या मेंहदी. इसे बॉर्डर क्रॉपिंग कहते हैं. जब जानवर सीमा पर ही रुक जाते हैं, तो अंदर की मुख्य फसल सुरक्षित बची रहती है. साथ ही, हर साल बदलकर फसल बोने से भी जानवरों का ध्यान आपके खेत पर कम भटकता है और नुकसान कम होता है.

Published at : 29 Jul 2026 12:44 PM (IST)

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