Peepal Banyan On Neem: कई बार जब आप सड़क से गुजर रहे होते हैं. तो नीम के तने या उसकी शाखाओं के बीच से पीपल या बरगद का पौधा उगता हुआ नज़र आ ही जाता है. ऐसे में कई बार लोगों के मन में यह सवाल आता है कि आखिर एक पेड़ के ऊपर से दूसरे पेड़ का पौधा कैसे आ सकता है? अगर आप भी सोचेंगे तो एक बार को यह अजीब जरूर लेगाग.
लेकिन साइंस के नज़रिए से इसके पीछे एक बेहद नार्मल सा लॉजिक है. यह सब नेचुरल इकोसिस्टम, बीजों के अंकुरण की खास प्रोसेस का नतीजा है. चलिए आपको बताते हैं कि आखिर यह पौधा नीम के पेड़ पर अपनी जगह कैसे बना लेता है.
पक्षियों की वजह से पेड़ पर पहुंच जाते हैं बीज
पीपल और बरगद के फल छोटे होते हैं. जिन्हें कौवे, मैना और बुलबुल जैसे पक्षी खूब खाते हैं. इन फलों के बीज इतने कठोर होते हैं कि पक्षियों के पेट में पच नहीं पाते. जब ये पक्षी उड़कर नीम की घनी टहनियों पर बैठते हैं, तो अपनी बीट के ज़रिए इन बीजों को वहीं छोड़ देते हैं.
नीम के तने में मौजूद गहरी दरारें, वहां फंसी हल्की धूल-मिट्टी, हवा की नमी और बीट में मौजूद पोषक तत्व मिलकर बीज को पनपने का सही माहौल दे देते हैं. जैसे ही अनुकूल मौसम आता है यह बीज नीम के तने पर ही अंकुरित हो जाता है.
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जड़ें मजबूत होने के बाद बन जाता है पेड़
शुरुआती दिनों में यह नन्हा पौधा नीम की छाल में मौजूद नमी और जैविक तत्वों के सहारे बढ़ना शुरू करता है. लेकिन जैसे-जैसे पौधे का आकार बढ़ता है, उसे ज़्यादा पानी और पोषक तत्वों की ज़रूरत होती है. ऐसे में यह अपनी हवाई जड़ों को तेज़ी से नीचे ज़मीन की तरफ फैलाना शुरू कर देता है.
कृषि विज्ञान की भाषा में इस प्रोसेस को एपिफाइटिक ग्रोथ कहते हैं. जैसे ही यह जड़ें नीचे पहुंचकर मिट्टी को छू लेती हैं. पौधा ज़मीन से सीधे न्यूट्रिएंट्स खींचने लगता है. वक्त के साथ ये जड़ें नीम को जकड़ लेती हैं और दोनों पेड़ एक साथ बढ़ने लगते हैं. तो बस यह होता है नीम पर पीपल और बरगद लगने के पीछे का साइंस.
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