Thursday, July 23, 2026
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पिछले 50 साल में कितनी बदली भारत की खेती? क्या अब भी गरीब है किसान- कितनी हुई मुनाफा वृद्धि


Farmers News: देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा आज भी खेती और किसानी पर जीवन यापन करता है. हालांकि अगर 50 साल पहले के दौर से तुलना करें तो काफी बदलाव आया है. तब देश की करीब 70% आबादी पूरी तरह से खेती पर निर्भर थी. जो आज घटकर 45% से 50% के आसपास रह गई है.  

इन पांच दशकों में खेती का अंदाज और तरीका पूरी तरह बदल गया है. हरित क्रांति के दौर से चला यह सफर आज ट्रैक्टर, सोलर पंप, ड्रिप इरिगेशन और मोबाइल ऐप्स तक पहुंच चुका है. हल-बैल से मशीनों तक का यह सफर देखने में तो अच्छा लगता है. लेकिन सवाल यही है कि क्या इस बदलाव ने किसान की जेब भरी है या वह आज भी तंगी झेल रहा है?

50 सालों में खेती में कितना बदलाव हुआ?

अगर पिछले 50 सालों के सफर को देखें तो खेती का तरीका पूरी तरह से आधुनिक और आसान हो चुका है. पहले किसान पूरी तरह से मानसून की बारिश और कुओं पर निर्भर रहता था. लेकिन अब नहरों के नेटवर्क, ट्यूबवेल और ड्रिप इरिगेशन ने सिंचाई की चिंता काफी कम कर दी है. 

हाइब्रिड बीजों, बेहतर खाद और आधुनिक मशीनों के आने से फसलों की पैदावार कई गुना बढ़ गई है. पहले जहां सिर्फ गेहूं और धान जैसी पारंपरिक फसलें ही उगाई जाती थीं. वहीं अब किसान पॉलीहाउस, बागवानी और कमर्शियल फार्मिंग की तरफ तेजी से बढ़ रहे हैं. आज का किसान घर बैठे मोबाइल से मंडी भाव देखता है और मौसम का हाल जानकर बुआई तय करता है.

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क्या अब भी गरीब है किसान?

पैदावार और तकनीक बढ़ने से किसानों की कुल आय में बढ़ोतरी तो ज़रूर हुई है. लेकिन इसके साथ ही खेती की लागत भी कई गुना बढ़ गई है. बीज, खाद, डीजल और मजदूरी के दाम लगातार बढ़े हैं, जिसकी वजह से शुद्ध मुनाफा उस तेजी से नहीं बढ़ पाया जिसकी उम्मीद थी. ज़मीन के छोटे-छोटे टुकड़े होने की वजह से छोटे किसानों के लिए आज भी बड़ा मुनाफा कमाना चुनौती बना हुआ है. 

कितना बढ़ा मुनाफा?

हालांकि जिन किसानों ने सिर्फ पारंपरिक अनाज के भरोसे न रहकर डेयरी फार्मिंग, ऑर्गेनिक खेती या कैश क्रॉप्स यानी नकदी फसलों में किस्मत आजमाई उनकी कमाई और जीवन स्तर में बड़ा सुधार आया है. यानी कह सकते हैं कि सान पहले से ज़्यादा सशक्त तो हुआ है. लेकिन हर किसान की गरीबी दूर हो गई हो ऐसा कहना सही नहीं होगा. कई किसान आज खेती से अच्छी जिंदगी जी रहे हैं. लेकिन कई आज भी सिर्फ गुजारा कर पा रहे हैं.

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