Stevia Farming Tips: आजकल लोग अपनी हेल्थ को लेकर काफी सीरियस हो गए हैं. चीनी से होने वाले नुकसानों को देखते हुए मार्केट में अब एक खास नेचुरल जड़ी-बूटी की डिमांड तेजी से बढ़ रही है, जिसे हम स्टीविया या मीठी तुलसी कहते हैं. यह पौधा डायबिटीज के मरीजों के लिए वरदान है क्योंकि यह चीनी से करीब दो सौ गुना ज्यादा मीठा होने के बावजूद ब्लड शुगर लेवल को बिल्कुल नहीं बढ़ाता है.
इसी जबरदस्त हेल्थ बेनिफिट की वजह से बाजार में इसके सूखे पत्ते एक हजार रुपये किलो तक के प्रीमियम रेट पर बिक रहे हैं. अगर हमारे किसान भाई पारंपरिक फसलों से हटकर इस मॉडर्न जड़ी-बूटी की खेती शुरू करते हैं, तो वे कम समय में अपनी किस्मत बदल सकते हैं.
एक बार का प्लांटेशन और पांच साल तक कमाई
इस जादुई जड़ी-बूटी की खेती का सबसे बड़ा प्लस पॉइंट यह है कि इसमें आपको बार-बार बुवाई करने की झंझट से पूरी तरह मुक्ति मिल जाती है. स्टीविया के पौधों को खेत में सिर्फ एक बार प्लांट करना पड़ता है और इसके बाद लगातार पांच साल तक इसकी पत्तियों की बंपर कटाई की जा सकती है. हर साल इसकी तीन से चार बार हार्वेस्टिंग आसानी से हो जाती है.
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जिसका मतलब है कि किसानों के लिए यह पांच सालों तक लगातार इनकम देने वाला बेहतरीन जरिया बन जाता है. इसके पौधों के लिए बहुत ज्यादा महंगे फर्टिलाइजर्स की भी जरूरत नहीं होती है. कम लागत और बेहद कम मेंटेनेंस में तैयार होने वाली यह फसल स्मार्ट फार्मिंग का सबसे बेस्ट उदाहरण है.
ऐसे करें प्रोसेसिंग
स्टीविया की खेती से मोटा मुनाफा कमाने का सीक्रेट इसकी सही प्रोसेसिंग में छिपा हुआ है. खेत से हरी पत्तियों की कटाई करने के बाद उन्हें अच्छी तरह से सुखाया जाता है. जब पत्तियां पूरी तरह ड्राई हो जाती हैं. तो उन्हें पीसकर पाउडर तैयार कर लिया जाता है. इस पाउडर का इस्तेमाल चाय, कॉफी और बेकिंग में चीनी के रिप्लेसमेंट के रूप में धड़ल्ले से किया जा रहा है.
मार्केट में बंपर प्रॉफिट
बड़ी-बड़ी फार्मा कंपनियां शुगर-फ्री प्रोडक्ट्स बनाने के लिए इसे हाथों-हाथ खरीद रही हैं. छोटे स्तर पर एक बीघा जमीन से शुरुआत करके भी किसान इसके सूखे पत्तों को डायरेक्ट मार्केट में बेचकर लाखों रुपये का शुद्ध प्रॉफिट आसानी से कमा सकते हैं.
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