Scheme For Livestock: गांव-देहात में पशुपालकों के लिए उनके मवेशी सिर्फ जानवर नहीं होते बल्कि घर के सदस्यों जैसे होते हैं, जिनसे पूरे परिवार की रोजी-रोटी और खुशियां जुड़ी होती हैं. लेकिन कई बार ऐसी स्थिति आ जाती है जहां मवेशियों को नुकसान पहुंच जाता है. कभी अचानक आई बाढ़ तो कभी आसमानी बिजली या शॉर्ट सर्किट से लगी आग पल भर में सब कुछ बर्बाद कर देती है. ऐसी किसी अनहोनी में जब किसी किसान का दुधारू पशु जान गंवा देता है.
तो उस पर आर्थिक और मानसिक दुखों का पहाड़ टूट पड़ता है. ऐसे ही मुश्किल वक्त में पशुपालकों का हाथ थामने और उन्हें दोबारा पैरों पर खड़ा करने के लिए सरकार एक बेहद धांसू स्कीम लेकर आई है. इस योजना के जरिए सरकार किसी भी प्राकृतिक आपदा में मवेशी का नुकसान होने पर सीधे आपके बैंक खाते में मोटी राहत राशि मिलेगी. जान लीजिए कैसे मिलेगी सरकारी मदद
पशु की मौत होने पर कितनी मिलेगी आर्थिक मदद?
बिहार सरकार के राज्य आपदा राहत कोष के तहत यह मदद दी जाती है. इसके लिए अलग-अलग मवेशियों की मौत पर मुआवजे की रकम तय कर रखी है. जो सीधे प्रभावित पशुपालक के खाते में भेजी जाती है. अगर किसी आपदा जैसे बाढ़, तूफान या आगजनी में गाय, भैंस या याक जैसे बड़े दुधारू पशु की मौत होती है. तो सरकार की तरफ से प्रति पशु 37500 रुपये की आर्थिक मदद दी जाती है.
वहीं अगर खेती के काम में आने वाले सांड, ऊंट या बैल जैसे कल्टीवेशन वाले जानवरों का नुकसान होता है. तो प्रति पशु 32000 रुपये का मुआवजा मिलता है. इसके अलावा भेड़, बकरी या सुअर जैसे छोटे जानवरों की मौत होने पर प्रति पशु 4000 रुपये की राशि दी जाती है. यह सहायता एक परिवार को अधिकतम तीन बड़े दुधारू पशुओं या 30 छोटे पशुओं की मौत तक मिल सकती है.
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मुआवजे के लिए जरूरी है कान का टैग
इस सरकारी स्कीम का लाभ उठाने के लिए सरकार ने कुछ बेहद कड़े और जरूरी नियम बनाए हैं. जिन्हें नजरअंदाज करने पर पैसा अटक सकता है. सबसे पहली और सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि आपके मृत पशु के कान में इनाफ (INAPH) का 12 अंकों वाला पीला प्लास्टिक टैग लगा होना अनिवार्य है. क्योंकि इसी टैग नंबर से पशु की पहचान और उसकी ओनरशिप साबित होती है. इसके बिना मुआवजे का क्लेम रिजेक्ट हो जाएगा.
समय पर आवेदन करने पर मिलेगी मदद
अनहोनी होने के बाद पशुपालक को बिना देरी किए स्थानीय सरकारी पशु अस्पताल के डॉक्टर से पोस्टमार्टम करवाना होता है.जिससे मौत की सही वजह साफ हो सके. इसके बाद पूरी रिपोर्ट, टैग नंबर और अपने बैंक खाते की डिटेल के साथ ब्लॉक या अंचल कार्यालय में तय समय सीमा के भीतर आवेदन जमा करना होता है. जिसके बाद वेरिफिकेशन पूरा होते ही पैसा सीधे खाते में आ जाता है.
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