Friday, July 31, 2026
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मानसून की देरी से इन फसलों में किसानों को हुआ घाटा, चाय पर भी पड़ा बुरा असर


Farming News: खेती में बारिश का बहुत बड़ा योगदान होता है.  हर साल बारिश का मौसम किसानों के लिए नई उम्मीद लेकर आता है. लेकिन इस बार मानसून की सुस्त चाल ने कई राज्यों में खेती का पूरा गणित बिगाड़ दिया. समय पर बारिश नहीं होने से खेतों में नमी की कमी बनी रही और बुवाई का काम भी प्रभावित हुआ. जिन किसानों ने पहले ही बीज डाल दिए थे उन्हें दोबारा बुवाई की चिंता सताने लगी.

जबकि कई इलाकों में किसान बारिश का इंतजार करते रहे. मानसून में हो रही इस देरी का असर चाय बागानों में देखने को मिल रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आने वाले दिनों में सही बारिश नहीं हुई तो कई फसलों की क्वालिटी और उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं. जान लीजिए किन फसलों पर पड़ा इसका बुरा असर.

धान, सोयाबीन और मक्का की खेती प्रभावित

मानसून में हुई देरी का सबसे ज्यादा असर खरीफ सीजन की प्रमुख फसलों पर देखने को मिला है. धान की रोपाई कई इलाकों में तय समय से पीछे चल रही है. क्योंकि खेतों में पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पाया. तो इसके अलावा सोयाबीन और मक्का की फसल भी इससे प्रभावित हुई है. कई किसानों को दोबारा बुवाई की तैयारी करनी पड़ रही है. जिससे बीज, मजदूरी और सिंचाई का खर्च बढ़ गया है. 

जिन इलाकों में सिंचाई के ज्यादा साधन नहीं हैं वहां मुश्किलें और ज्यादा बढ़ गई हैं. फिलहाल मौसम को देखते हुए किसानों को फसलों पर खास ध्यान देना चाहिए और जरूरत पड़ने पर कम पानी वाली फसलों की ओर रुख करना चाहिए. 

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चाय बागानों पर असर

मानसून की देरी का असर चाय बगानों पर भी देखने को मिल रहा है. चाय की नई पत्तियों की अच्छी बढ़त के लिए सही बारिश और सही तापमान जरूरी होता है. लेकिन इस बार मौसम का माहौल बिगड़ने से पौधों की बढ़वार धीमी पड़ गई. कई चाय उत्पादक क्षेत्रों में उत्पादन घट रहा है. वहीं पत्तियों की क्वालिटी पर भी असर देखने को मिल रहा है. 

उत्पादन कम होने पर बाजार में चाय की कीमतों में इजाफा देखने को मिल सकता है. अगर जल्द ठीक-ठीक बारिश नहीं हुई तो आने वाले हफ्तों में हालात और मुश्किल हो सकते हैं. फिलहाल किसान और चाय बागान संचालक दोनों की नजर मौसम पर टिकी हुई है. क्योंकि अच्छी बारिश ही नुकसान को कम करने और फसलों के साथ चाय उत्पादन को संभालने में सबसे बड़ी रोल अदा कर सकते है.

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