Tuesday, July 7, 2026
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यूएई में रहने वाले भारतीय उद्यमी डॉ. शमशीर वयालिल द्वारा दी गई रु2.6 करोड़ की राहत सहायता, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश में दुबई हादसे के पीड़ितों के परिवारों तक पहुँची

यूएई में रहने वाले भारतीय उद्यमी डॉ. शमशीर वयालिल द्वारा दी गई रु2.6 करोड़ की राहत सहायता, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश में दुबई हादसे के पीड़ितों के परिवारों तक पहुँची

भारत में स्थित परिवारों के अलावा, मानवीय पुनर्वास पैकेज के तहत श्रीलंका में मृतक कर्मचारी के परिवार को भी मिली सहायता उत्तर प्रदेश के मऊ ज़िले के मृतक कर्मचारी की बेटी को नर्सिंग की पढ़ाई करने और भविष्य में यूएई में नौकरी के लिए हर ज़रूरी मदद का आश्वासन दिया गया

दुबई,नई दिल्लीः दुबई की एमिरेट्स सड़क दुर्घटना से प्रभावित परिवारों के लिए यूएई के भारतीय उद्यमी डॉ. शमशीर वयालिल द्वारा घोषित रु2.6 करोड़ का मानवीय राहत पैकेज, भारत के तेलंगाना और उत्तर प्रदेश में मृत कर्मचारियों के परिवारों तक पहुँच गया है।

यह राहत पहल जून में दुबई में हुए एमिरेट्स सड़क हादसे के बाद शुरू की गई है, जिसमें मज़दूरों को ले जा रही एक मिनीबस एक खड़े ट्रक से टकरा गई थी। इस हादसे में सात लोगों की मौत हो गई थी और नौ लोग घायल हो गए थे। बाद में पीड़ितों की पहचान प्रवासी मज़दूरों के तौर पर हुई और इस हादसे के बाद पूरे यूएई और भारत में शोक और मदद की कोशिशें शुरू हुईं।

इस दुर्घटना में सात कर्मचारियों की मौत हो गई थी। डॉ. शमशीर के कार्यालय के प्रतिनिधियों ने दुर्घटना में मारे गए छह भारतीय कर्मचारियों के परिवारों से मुलाक़ात की। उन्होंने तेलंगाना और उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों का दौरा कि, शोक-संतप्त परिवारों से मिले, उनके प्रति संवेदना और समर्थन व्यक्त किया और उन तक आर्थिक सहायता पहुंचाई। एक प्रतिनिधि ने दुर्घटना में जान गंवाने वाले श्रीलंकाई कर्मचारी के परिवार से भी मुलाक़ात की।

इस मानवीय राहत प्रोग्राम के तहत, मारे गए प्रत्येक कर्मचारी के परिवार को रु26 लाख मिल रहे हैं। प्रभावित परिवारों के बच्चों की आगे की शिक्षा हेतु ज़रूरी सहयोग का आकलन किया जा रहा है और इस बारे में सीधे परिवारों के साथ संपर्क किया जाएगा।

यूपी के परिवारों ने अधूरे सपनों को याद किया
उत्तर प्रदेश में, मऊ ज़िले में कोपागंज के 38 वर्षीय अब्दुल रशीद ज़ाकिर हुसैन, मऊ ज़िले में खुराहट के 39 वर्षीय मार्कंडेय चौहान भजन चौहान और बिजनौर ज़िले में सहसपुर के 31 वर्षीय मोहम्मद साकिब लियाकत अली के परिवार के साथ मुलाकात की गई।

मऊ के खुराहट में, मार्कंडेय के परिवार ने खाड़ी देशों में उनके कई सालों के काम को याद करते हुए बताया कि उन्होंने अपने बच्चों के लिए बड़े सपने देखे थे। उनके परिवार में उनकी पत्नी सरस्वती देवी और तीन बच्चे हैं, उनकी 17 साल की बेटी अंकिता चौहान ने जिन्होंने हाल ही में 12वीं कक्षा की पढ़ाई पूरी की है।

मुलाकात के दौरान, वीपीएस हेल्थ के संस्थापक और चेयरमैन डॉ. शमशीर ने परिवार से वीडियो कॉल पर बात की। जब अंकिता ने बताया कि वह बीएससी नर्सिंग करना चाहती हैं, तो डॉ. शमशीर ने कहा, “हम आपकी पढ़ाई पूरी करने में आपकी मदद करेंगे। अच्छे से पढ़ाई करें और कोर्स पूरा करें। उसके बाद हम आपको यहां बुलाएंगे। मार्कंडेय जी को आपके ज़रिए हर दिन याद किया जाएगा।”

कोपागंज में, अब्दुल रशीद के परिवार ने बताया कि अब्दुल दुर्घटना की खबर मिलने से दो महीने पहले ही गए थे। उनके परिवार में उनकी पत्नी फरीदा खातून और तीन छोटी बेटियाँ हैं।
उनकी पत्नी के भाई मोहम्मद आमिर ने बताया, “वे कहते थे कि आखिरी बार नौकरी के लिए विदेश जा रहे हैं, एक बार लौटने के बाद दोबारा कभी नहीं जाएंगे।’’

परिवार ने बताया कि अब्दुल रशीद अपने बच्चों को पढ़ाना-लिखाना चाहते थे और अपने छोटे से घर को बेहतर बनाना चाहते थे।

बिजनौर के सहसपुर में, मोहम्मद साकिब के परिवार ने बताया कि वे एल्युमीनियम फैब्रिकेटर के रूप में काम करते थे। करीब आठ महीने पहले वे पहली बार दुबई गए। वे अपनी माँ और बहनों की मदद करना चाहते थे और कई मुश्किलों के बावजूद वहाँ डटे रहे, इस उम्मीद में कि यूएई में काम करके वे अपने परिवार को बेहतर ज़िंदगी दे सकेंगे।

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