Saturday, June 13, 2026
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हाथ में नहीं आएगा ये आम, इस किसान ने बाग में उगाया 5 किलो का मैंगो; कीमत 3000 रुपये


Noorjahan Mango: गर्मियों के सीजन में आम तो आपने बहुत खाए होंगे लेकिन आज हम आपको एक ऐसे जादुई आम के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे उठाकर खाने के लिए आपको अपने दोनों हाथों का इस्तेमाल करना पड़ेगा. मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल अलीराजपुर जिले में उगने वाला नूरजहां आम इन दिनों सोशल मीडिया से लेकर फल बाजारों तक हर जगह गर्दा उड़ा रहा है. 

इस अनोखे आम का साइज इतना बड़ा है कि इसके सिर्फ एक फल का वजन ढाई किलो से लेकर पूरे 5 किलो तक पहुंच जाता है. अपने इसी भारी-भरकम आकार और गजब के स्वाद की वजह से यह पूरे भारत में मशहूर हो चुका है. आलम यह है कि इस आम को देखने के लिए दूर-दूर से सैलानी और आम प्रेमी इस बाग में पहुंच रहे हैं. जो इसकी खूबियों को देखकर दंग रह जाते हैं.

 कीमत है पूरे 3000 रुपये

इस अनोखे नूरजहां आम को उगाने वाले स्थानीय किसान युवराज सिंह बताते हैं कि इस फल की दीवानगी लोगों में इस कदर है कि फसल पकने से पहले ही यह पेड़ पर ही एडवांस बुक हो जाता है. भारी मांग के चलते इसके सिर्फ एक आम की कीमत 3000 रुपये तक पहुंच जाती है, जिसे खरीदना हर किसी के बस की बात नहीं है. 

पेड़ पर ही हो जाती है एडवांस बुकिंग

आम के शौकीन लोग महीनों पहले से ही इस खास आम का स्वाद चखने के लिए अपनी बुकिंग पक्की करवा लेते हैं. कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक और प्रमुख डॉ. राकेश यादव भी इस आम की जमकर तारीफ करते हैं. उनका कहना है कि इस आम का इतना भारी वज आकर्षण का केंद्र है. जो इसे दुनिया के बाकी आमों से बिल्कुल अलग बनाता है.

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विदेशी नस्ल का इतिहास 

कई बड़े-बड़े पुरस्कार अपने नाम कर चुका नूरजहां आम मूल रूप से अफगानिस्तान की प्रजाति माना जाता है. लेकिन अलीराजपुर की जलवायु ने इसे ऐसा अपनाया कि अब यह यहीं की शान बन चुका है. बाग में पहुंचे पर्यटक रवि जोशी जैसे कई लोग इसकी विशालता को देखकर इसे कुदरत का करिश्मा मानते हैं. 

लगातार बढ़ाई जा रही है पेड़ों की संख्या

इस आम की बढ़ती लोकप्रियता और किसानों के लिए इसके तगड़े मुनाफे को देखते हुए अब कृषि वैज्ञानिक इसके पेड़ों की संख्या को लगातार बढ़ाने की प्लानिंग पर काम कर रहे हैं. वैज्ञानिक इसके नए पौधे तैयार कर रहे हैं जिससे आने वाले समय में इस अनोखी और कीमती प्रजाति को विलुप्त होने से बचाया जा सके. 

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इनपुट-मनीष गिरधानी



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