Sesbania Crop: खेती-किसानी की दुनिया में आमतौर पर फसलों को इसलिए उगाया जाता है ताकि उन्हें काटकर बाजार में बेचा जा सके और तगड़ा मुनाफा कमाया जा सके. लेकिन क्या आपने कभी किसी ऐसी जादुई फसल के बारे में सुना है जिसे किसान खेत में उगाता तो है पर न तो उसे काटता है और न ही बाजार में बेचने जाता है.
जी हां, हम बात कर रहे हैं हरी खाद की सबसे धांसू फसल ढैंचा के बारे में जो किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. इस फसल को खेत में उगाकर सीधे मिट्टी में ही ट्रैक्टर चलाकर पलट दिया जाता है. यह अनोखा तरीका मिट्टी की सेहत को एकदम चकाचक कर देता है और खेतों को प्राकृतिक रूप से इतने न्यूट्रिएंट्स मिल जाते हैं कि बंजर जमीन भी सोना उगलने लगती है.
बढ़ जाएगी मिट्टी की ताकत
रासायनिक खादों के अंधाधुंध इस्तेमाल से आजकल खेतों की उपजाऊ क्षमता लगातार कम होती जा रही है. जिससे किसान भाई बेहद परेशान रहते हैं. ऐसे में ढैंचा की फसल मिट्टी के लिए एक बेहतरीन बूस्टर डोज़ की तरह काम करती है. जब इस फसल को खेत में ही सड़ाया जाता है. तो मिट्टी को भारी मात्रा में नाइट्रोजन और ऑर्गेनिक कार्बन मिलते हैं.
यूरिया-डीएपी का खर्चा होगा आधा
इससे जमीन की नमी सोखने की क्षमता बहुत ज्यादा बढ़ जाती है और मिट्टी एकदम भुरभुरी हो जाती है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि अगली मुख्य फसल जैसे धान या गेहूं बोते समय आपको बाजार से महंगे यूरिया और डीएपी खाद खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती है. जिससे खेती की लागत सीधे आधी हो जाती है.
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कम पानी में झटपट तैयार
ढैंचा फसल की सबसे अच्छी बात यह है कि इसे उगाने में न तो ज्यादा पानी खर्च होता है और न ही किसी खास मेहनत की जरूरत पड़ती है. इसे अमूमन अप्रैल से जून के महीने में खाली खेतों में बोया जाता है और यह मात्र 40 से 50 दिनों में अच्छी-खासी ऊंचाई तक तैयार हो जाती है.
ढैंचा उगाने का सिंपल तरीका
जब इस फसल में फूल आने शुरू होते हैं ठीक उसी समय खेत में रोटावेटर या हैरो चलाकर इसे मिट्टी में दबा दिया जाता है. पानी के संपर्क में आते ही यह हरी फसल खेत के अंदर ही सड़कर बेहतरीन कंपोस्ट खाद बन जाती है. इस आसान तरकीब को अपनाकर किसान भाई बिना एक भी रुपया बाजार में खर्च किए अपनी फसल की पैदावार को कई गुना तक बढ़ा रहे हैं.
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