Wednesday, March 11, 2026
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UGC : No Reserved vacancy sc st Can Be Dereserved Education Ministry Clarifies On UGC Draft Guidelines – UGC : शिक्षा मंत्रालय ने साफ, आरक्षित पद को अनारक्षित नहीं कर सकते, यूजीसी के सुझाव खारिज, Education News


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शिक्षा मंत्रालय (एमओई) ने रविवार को स्पष्ट किया कि किसी भी आरक्षित पद को अनारक्षित नहीं किया जा सकता। मंत्रालय का यह स्पष्टीकरण विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के एक मसौदा दिशानिर्देशों के बाद आया। यूजीसी के मसौदा दिशानिर्देशों में प्रस्ताव किया गया था कि अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) या अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित रिक्तियां इन श्रेणियों के पर्याप्त उम्मीदवार उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में अनारक्षित घोषित की जा सकती हैं। ‘उच्च शिक्षा संस्थानों में भारत सरकार की आरक्षण नीति के कार्यान्वयन के लिए दिशा-निर्देश’ हितधारकों की आपत्ति और सुझाव के लिए जारी किये गये थे।

आरक्षण से जुड़े अधिनियम का हवाला दिया

शिक्षा मंत्रालय ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी पोस्ट में कहा, केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों (शिक्षकों के संवर्ग में आरक्षण) अधिनियम, 2019 के अनुसार शिक्षक संवर्ग में सीधी भर्ती के सभी पदों के लिए केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण प्रदान किया जाता है। मंत्रालय ने कहा, इस अधिनियम के लागू होने के बाद, किसी भी आरक्षित पद का आरक्षण समाप्त नहीं किया जाएगा। शिक्षा मंत्रालय ने सभी केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों (सीईआई) को 2019 अधिनियम के अनुसार रिक्तियों को भरने के निर्देश दिए हैं।

यूजीसी अध्यक्ष ने भी घोषणा कीः

इस मुद्दे पर यूजीसी अध्यक्ष एम जगदेश कुमार ने भी स्पष्ट किया कि अतीत में केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों (सीईआई) में आरक्षित श्रेणी के पद का आरक्षण रद्द नहीं किया गया और ऐसा कोई आरक्षण समाप्त नहीं किया जाने वाला है। उन्होंने कहा, सभी उच्च शैक्षणिक संस्थानों के लिए यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि आरक्षित श्रेणी के सभी पूर्व में रिक्त पद (बैकलॉग) ठोस प्रयासों से भरे जाएं।

मसौदा दिशा-निर्देशों की आलोचना हुई

मसौदा दिशानिर्देशों को आलोचना का सामना करना पड़ा। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि उच्च शिक्षा संस्थानों में पदों पर एससी, एसटी और ओबीसी को दिए गए आरक्षण को समाप्त करने की साजिश की जा रही और केंद्र मोदी सरकार दलितों, पिछड़े वर्गों और आदिवासियों के मुद्दों पर केवल प्रतीक की राजनीति  कर रही है। जेएनयू छात्र संघ (जेएनयूएसयू) ने इस मुद्दे पर यूजीसी अध्यक्ष के खिलाफ सोमवार को विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की।

क्या थे नए मसौदा दिशानिर्देश

यूजीसी के नये मसौदा दिशानिर्देशों के अनुसार, आरक्षित रिक्ति को एससी या एसटी या ओबीसी अभ्यर्थी के अलावा किसी अन्य अभ्यर्थी द्वारा नहीं भरा जा सकता। इसमें कहा गया, हालांकि, एक आरक्षित रिक्ति को अनारक्षित करने की प्रक्रिया का पालन करके अनारक्षित घोषित किया जा सकता है, जिसके बाद इसे अनारक्षित रिक्ति के रूप में भरा जा सकता है।

इसमें कहा गया है, सीधी भर्ती के मामले में आरक्षित रिक्तियों को अनारक्षित घोषित करने पर प्रतिबंध है। हालांकि समूह ‘ए’ सेवा में जब कोई रिक्ति सार्वजनिक हित में खाली नहीं छोड़ी जा सकती। ऐसे में इस तरह के दुर्लभ और असाधारण मामलों में संबंधित विश्वविद्यालय रिक्ति के आरक्षण को रद्द करने का प्रस्ताव तैयार कर सकता है।  प्रस्ताव में पद भरने के लिए किये गए प्रयास सूचीबद्ध करने होंगे, रिक्ति को क्यों खाली नहीं रखा जा सकता, इसका कारण बताना होगा और आरक्षण रद्द करने का औचित्य क्या है, यह भी बताना होगा।

मसौदा दिशानिर्देश में कहा गया, ग्रुप ‘सी’ या ‘डी’ के मामले में आरक्षण समाप्त करने का प्रस्ताव विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद को भेजा जाना चाहिए और समूह ‘ए’ या ‘बी’  के मामले में प्रस्ताव आवश्यक अनुमोदन के लिए पूर्ण विवरण के साथ शिक्षा मंत्रालय को प्रस्तुत किया जाना चाहिए। मंजूरी मिलने के बाद पद भरा जा सकता है और आरक्षण को आगे बढ़ाया जा सकता है।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की कुलपति शांतिश्री डी. पंडित ने कहा, ‘जेएनयू में कोई भी पद अनारक्षित नहीं किया गया है। हमें आरक्षित श्रेणी के तहत बहुत अच्छे अभ्यर्थी  मिले हैं।’

 



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