Friday, April 3, 2026
Google search engine
Homeकृषि समाचारयुद्ध से लेकर मौसम तक, ये 4 वार कर रहे किसानों भाइयों...

युद्ध से लेकर मौसम तक, ये 4 वार कर रहे किसानों भाइयों पर तगड़ा अत्याचार


Problems For Farmers: अप्रैल की शुरुआत के साथ ही किसान भाइयों के लिए चुनौतियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. एक तरफ आसमान से बरसती आग और बेमौसम बारिश का डर है. तो दूसरी तरफ सात समंदर पार छिड़ी जंग ने खेती का पूरा बजट बिगाड़ दिया है. ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने ग्लोबल मार्केट को हिला दिया है. 

जिसका सीधा असर हमारे खेतों और मंडियों तक पहुंच रहा है. ये चार मोर्चे ऐसे हैं जो इस वक्त अन्नदाता पर चौतरफा हमला कर रहे हैं. इन मुश्किलों से निपटने के लिए किन चीजों की होगी जरूरत और किन बातों को रखना होगा ध्यान. जान लीजिए.

मिडिल ईस्ट की जंग 

मिडिल ईस्ट में मचे घमासान ने कच्चे तेल की कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया है. जिसका सीधा असर भारत में डीजल के दामों पर दिख रहा है. जब ईरान और इजरायल जैसे देश आपस में भिड़ते हैं. तो ग्लोबल सप्लाई चेन पूरी तरह डिस्टर्ब हो जाती है. किसानों के लिए डीजल सिर्फ ईंधन नहीं. बल्कि सिंचाई और जुताई की लाइफलाइन है.

डीजल महंगा होने से ट्रैक्टर का किराया और पंप सेट चलाने का खर्चा काफी बढ़ गया है. इसके अलावा खाड़ी देशों से आने वाले कच्चे माल की कमी के कारण खाद और कीटनाशकों की कीमतों में भी उछाल आने का खतरा मंडरा रहा है.

  • कच्चा तेल महंगा होने से डीजल के दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रहे हैं.
  • ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ने से खाद और बीज की बोरियां भी महंगी मिल रही हैं.
  • खेती की ओवरऑल इनपुट कॉस्ट बढ़ने से किसानों का मुनाफा घट रहा है.

यह भी पढ़ें: राजस्थान के इस शख्स ने 15 रुपये के आंवले से कमाए करोड़ों, सक्सेस स्टोरी कर देगी इंस्पायर

हीट स्ट्रेस और तपता हुआ अप्रैल

अप्रैल का महीना शुरू होते ही सूरज के तेवर तल्ख हो गए हैं और ‘हीट स्ट्रेस’ फसलों के लिए साइलेंट किलर साबित हो रहा है. अचानक बढ़ी इस गर्मी की वजह से गेहूं और अन्य रबी फसलों के दाने समय से पहले सूखने लगे हैं. जिससे पैदावार में भारी गिरावट आ सकती है. हीट वेव के कारण पौधों का मेटाबॉलिज्म बिगड़ जाता है और वे अपनी पूरी क्षमता से ग्रो नहीं कर पाते. ऐसे में किसानों को सिंचाई के पैटर्न में बदलाव करना पड़ रहा है. 

  • भीषण गर्मी से फसलों की नमी जल्दी खत्म हो रही है और दाने सिकुड़ रहे हैं.
  • पौधों को बचाने के लिए बार-बार सिंचाई की जरूरत पड़ रही है.
  • तापमान में अचानक बढ़ोतरी से पैदावार 10 से 20 परसेंट तक कम हो सकती है.

बेमौसम बारिश ओलावृष्टि का अलर्ट

एक तरफ गर्मी जान निकाल रही है. तो दूसरी तरफ मौसम विभाग ने 6 अप्रैल तक कई हिस्सों में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट जारी किया है. अप्रैल के इस अनप्रिडिक्टेबल मौसम ने किसानों की रातों की नींद उड़ा दी है क्योंकि कटी हुई फसलें खेतों में खुले आसमान के नीचे पड़ी हैं. अगर इस वक्त बारिश या ओले गिरते हैं. तो साल भर की मेहनत मिट्टी में मिल सकती है. 

  • कटी हुई फसलों को भीगने से बचाना इस वक्त सबसे बड़ी चुनौती है.
    ओलावृष्टि से पक कर तैयार खड़ी फसलें पूरी तरह बर्बाद हो सकती हैं.
  • नमी की वजह से अनाज की चमक कम हो जाती है और मंडी में दाम गिर जाते हैं.

खाद की किल्लत

भारत अपनी खाद की जरूरतों के लिए काफी हद तक दूसरे देशों पर निर्भर है और युद्ध जैसे हालात इस निर्भरता को और भी घातक बना देते हैं. अमोनियम नाइट्रेट और अन्य रसायनों की सप्लाई चेन टूटने से फर्टिलाइजर कंपनियों को प्रोडक्शन में दिक्कत आ रही है. हालांकि सरकार ने कुछ रियायतें दी हैं. लेकिन ग्लोबल क्राइसिस का दबाव फिर भी बना हुआ है. समय पर सही खाद न मिलना किसानों के लिए किसी अत्याचार से कम नहीं है.

  • अंतरराष्ट्रीय बाजार में तनाव से खाद के कच्चे माल की किल्लत हो रही है.
  • पीक सीजन में खाद न मिलने से फसल की क्वालिटी पर बुरा असर पड़ता है.
  • आत्मनिर्भर बनने के लिए अब किसानों को आर्गेनिक विकल्पों पर सोचना होगा.

यह भी पढ़ें: पेट्रोल-डीजल महंगा होने से किसानों भाइयों को क्या नुकसान, अब कौन-से काम करने में होगी दिक्कत?



Source link

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments