Taiwanese Bottle Gourd Farming: परंपरागत खेती से सीमित आमदनी के बीच जब किसान तेजी से सब्जी उत्पादन की ओर रुख कर रहे हैं. खासकर ऐसी फसलें, जो कम समय में तैयार होकर तुरंत नकद कमाई दें, किसानों के लिए ज्यादा फायदेमंद साबित हो रही है. इसी कड़ी में ताइवानी किस्म की लौकी की खेती एक अच्छा ऑप्शन बनकर सामने आई है. जिससे कम लागत में ज्यादा उत्पादन और अच्छा मुनाफा मिल रहा है. देश भर में किसान धान और गेहूं जैसी पारंपरिक फसलों के साथ अब सब्जियों की खेती को अपना रहे हैं. किसानों का कहना है कि जहां पहले साल भर में मेहनत के बाद समिति आमदनी होती थी, वहीं अब सब्जियों से जल्दी और नियमित आय मिल रही है. दरअसल ताइवानी लौकी की खेती से एक फसल में ही हजारों रुपये का मुनाफा कमाया जा रहा है.
क्यों फायदेमंद है ताइवानी लौकी की खेती?
कृषि एक्सपर्ट्स के अनुसार इस किस्म की सबसे बड़ी खासियत इसकी ज्यादा पैदावार और बाजार में लगातार बनी रहने वाली मांग है. खासकर गर्मियों के मौसम में इसकी खपत बढ़ जाती है, जिससे किसानों को बेहतर दाम मिलते हैं. यह फसल करीब 50 से 60 दिनों में तैयार हो जाती है, जिससे कम समय में मुनाफा मिलना शुरू हो जाता है.
ताइवानी लौकी खेती में लागत कम और कमाई ज्यादा
ताइवानी लौकी की खेती में लागत ज्यादा नहीं आती है. एक बीघा में बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी मिलाकर करीब 7 से 15000 रुपये तक खर्च आता है. वहीं उत्पादन और बाजार कीमत के आधार पर किसान एक फसल से 70 से लेकर 1 लाख रुपये तक की कमाई कर सकते हैं. कुछ किसान एक से ज्यादा बीघा में खेती करके, इससे और ज्यादा लाभ भी ले रहे हैं.
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कैसे कर सकते हैं ताइवानी लौकी की खेती?
ताइवान लौकी की खेती के लिए सबसे पहले खेत की अच्छी तरह जुताई करना जरूरी होता है. इसके बाद खेत में मेड बनाकर निश्चित दूरी पर बीज बोए जाते हैं. बेहतर उत्पादन के लिए पौधों के बीच सही दूरी रखना जरूरी है. बुवाई के कुछ समय बाद सिंचाई की जाती है, जिससे पौधे तेजी से बढ़ते हैं.
मचान विधि से बढ़ता है उत्पादन
इस खेती में मचान या स्टेचर विधि का इस्तेमाल काफी फायदेमंद माना जाता है. इसमें बांस और तार की मदद से ढांचा तैयार किया जाता है. जिस पर बेल चढ़ाई जाती है. इससे लौकी जमीन से ऊपर रहती है, जिससे फल सीधा और साफ बनता है. साथ ही लौकी में रोग लगने की संभावना कम हो जाती है और तुड़ाई में भी आसानी रहती है. वहीं फरवरी और मार्च का समय इस लौकी की बुवाई के लिए उपयुक्त माना जाता है. इस समय बोई गई फसल गर्मियों में तैयार होकर अच्छी कीमत दिलाती है. इसके अलावा उन्नत और हाइब्रिड किस्म का चयन करने से उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में फायदा होता है.
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