Thursday, July 23, 2026
Google search engine
Homeचुनावहिंदुत्व को धार और जमीनी ‘लड़ाका’; BJP ने बंगाल में पहले CM...

हिंदुत्व को धार और जमीनी ‘लड़ाका’; BJP ने बंगाल में पहले CM के तौर पर शुभेंदु को ही क्यों चुना?, National Hindi News


Suvendu Adhikari First BJP CM in Bengal: शुभेंदु माहिष्य समुदाय से आते हैं, जो खेतीबारी का काम करता है और ग्रामीण इलाकों में जिसकी बसावट है। इसकी कुल आबादी का करीब 10 फीसदी है।

Suvendu Adhikari as First BJP CM in Bengal: भारतीय जनता पार्टी (BJP)अपने संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी के गृह राज्य पश्चिम बंगाल में पहली बार सरकार बनाने जा रही है। राज्य के नौवें मुख्यमंत्री के रूप में शुभेंदु अधिकारी शनिवार (9 मई) को पद एवं गोपनीयता की शपथ लेंगे। पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं है, बल्कि इसे एक बड़े राजनीतिक प्रयोग की सफलता के रूप में देखा जा रहा है। हालिया चुनावों में भाजपा की ऐतिहासिक और प्रचंड जीत के बाद शुभेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री पद के लिए चुनना न सिर्फ उनके संघर्ष और कठिन मेहनत का इनाम है बल्कि बंगाल की बदलती सामाजिक, जातीय और राजनीतिक संरचना को ध्यान में रखकर भाजपा का उठाया गया एक बेहद रणनीतिक और दूरगामी प्रभाव वाला कदम है।

दरअसल, लगातार दो चुनावों में ममता बनर्जी को उसके गढ़ में घुसकर हरानेवाले शुभेंदु को सीएम चेहरा चुनकर भाजपा ने बड़ा दांव चला है। ऐसे में यह जानना दिलचस्प हो गया है कि आखिर वो क्या कारण रहे जिसकी वजह से भाजपा ने शुभेंदु अधिकारी को ही बंगाल में अपना पहला मुख्यमंत्री चुना।

‘भद्रलोक की राजनीति’ तोड़ने का मास्टरस्ट्रोक

दशकों तक बंगाल की राजनीति कथित भद्रलोक यानी उच्च जाति के ब्राह्मण और कायस्थ वर्ग के साथ-साथ शहरी अभिजात्य वर्ग के इर्द-गिर्द ही घूमती रही है लेकिन भाजपा ने शुभेंदु अधिकारी को आगे कर उस तथाकथित भद्रलोक के आवरण को न सिर्फ तोड़ने की कोशिश की है बल्कि उसमें सेंधमारी भी की है। भाजपा ने इस भद्रलोक के खेल को पूरी तरह से बदल दिया है और उसे ग्रामीण, कृषक और अन्य पिछड़े वर्ग समाज तक पहुंचा दिया है।

दरअसल, शुभेंदु माहिष्य समुदाय से आते हैं, जो राज्य में खेतीबारी का काम करता है और ग्रामीण इलाकों में जिसकी बसावट है। इसकी आबादी राज्य की कुल आबादी का करीब 10 फीसदी है। मेदिनीपुर बेल्ट और दक्षिण बंगाल के कुछ हिस्सों में इस समुदाय की भारी मौजूदगी है। संदेश साफ है कि भाजपा ने भद्रलोक की जगह ओबीसी को तरजीह देना चुना ताकि बंगाल की सत्ता गांव, खेत और पिछड़े समाज के हाथों में जा सके और भाजपा लंबे समय तक उनकी बदौलत सत्ता में रह सके। इसके अलावा शुभेंदु अधिकारी को ऊँचा ओहदा देना, उत्तर बंगाल के नमाशुद्र (मतुआ) और राजवंशी समुदायों को भी एक जोरदार संदेश है कि BJP गैर-भद्रलोक नेतृत्व के प्रति प्रतिबद्ध है और उनकी आकांक्षाओं को समझती है।

कट्टर हिन्दुत्व की राग, ‘जय श्री राम’ को बंगाल की लड़ाई बनाया

कुछ वर्ष पहले तक बंगाल में भाजपा बाहरी पार्टी कही जाती थी लेकिन शुभेंदु अधिकारी ने हिंदुत्व को “स्थानीय बांग्ला अस्मिता” से जोड़ दिया। उन्होंने विधानसभा चुनाव को सिर्फ ममता सरकार बदलने की लड़ाई नहीं रहने दिया बल्कि उसे “बंगाली हिंदू पहचान बनाम तुष्टिकरण” की लड़ाई बना दिया। इसका नतीजा यह हुआ कि राज्य में जबरदस्त हिन्दुत्व की लहर पैदा हुई, जिसका प्रभाव मालदा, मुर्शिदाबाद और सीमावर्ती इलाकों में भी देखने को मिला, जहां हिंदू वोटों का जबरदस्त ध्रुवीकरण देखने को मिला।

भाजपा को चाहिए था ‘कमांडर’, सिर्फ नेता नहीं

बंगाल में भाजपा के पास ज़मीनी स्तर पर अपनी ऐसी कोई मशीनरी नहीं थी, जो TMC के “ज़ोरदार” बूथ-स्तरीय नेटवर्क का मुक़ाबला कर सके। जबकि भाजपा को एक ऐसे चेहरे की तलाश थी जो सड़क पर संघर्ष कर सके, सड़क की राजनीति को समझ सके, मैदान में डटकर मुकाबला कर सके और TMC की जमी जमाई राजनीति में छेद कर सके। शुभेंदु ने यह भूमिका बखूबी निभाई।वह अपने साथ TMC से एक बना-बनाया संगठनात्मक ढाँचा लेकर आए, जिसे “दादागिरी” नेटवर्क कहा जाता था और जिसे उनके परिवार ने दशकों तक पुरबा मेदिनीपुर में सींचा था। शुभेंदु अधिकारी ने इसे अपने कौशल क्षमता से भाजपा को सक्षम बनाया।

दो बार ममता को हराने वाला

राजनीति में संकेत और प्रतीक कापी मायने रखते हैं। इस लड़ाई में शुभेंदु ममता का विकल्प बनकर उभरे क्योंकि उन्होंने दो विधानसभा चुनावों में लगातार टीएमसी प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हराया। 2021 में शुभेंदु ने ममता को नंदीग्राम सीट पर और इस बार 2026 में भबानीपुर सीट पर शुभेंदु ने ममता को पटखनी दी। ममता को ऐसी हार देकर उन्होंने खुद को ज्वायंट किलर साबित किया है और यह भी संदेश दिया कि TMC अजेय नहीं है।



Source link

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments