पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में माछ-भात और झालमुड़ी की खूब चर्चा हो रही थी। ममता बनर्जी ने माछ-भात को चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश तो की लेकिन बीजेपी नेता माछ-भात खाने ही पहुंच गए। ऊपर से पीएम मोदी ने झालमुड़ी खाकर चुनाव का रंग ही बदल दिया।
पश्चिम बंगाल के चुनाव में इस बार उद्योग, रोजगार और विकास से कहीं ज्यादा महिला सुरक्षा, खान-पान और संस्कृति को लेकर गहमाहमी थी। पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह लगातार अपनी रैलियों में कह रहे थे कि इस बार बीजेपी 200 को पार करने वाली है। हालांकि अच्छे-अच्छे विश्लेषकों को भी इस दावे पर यकीन नहीं हो रहा था। 4 मई को दोपहर होते-होते बीजेपी दो तिहाई के बहुमत पर पहुंचने पर कामयाब हो गई। इस बार बंगाल में ‘माछ भात’ और ‘झालमुड़ी’ की खूब चर्चा हुई। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि दोनों ही फैक्टर ने चुनाव में बड़ी भूमिका निभाई है। तीसरा फैक्टर ‘जय मां काली’ का नारा भी कहा जा सकता है।
‘माछ -भात’ को मुद्दा नहीं बना पाई टीएमसी
ममता बनर्जी बीजेपी को बंगाली अस्मिता का खतरा बना रही थीं। तभी बीजेपी ने इसका काट निकाल लिया। बीजेपी नेता अनुराग ठाकुर ने सार्वजनिक तौर पर माछ-भात का स्वाद चखा तो ममता बनर्जी का एक मुद्दा ही फेल हो गया। संस्कृति की बात हुई तो रही सही कसर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘झालमुड़ी’ खाकर पूरी कर दी। ये दोनों ही चीजें चुनावी एजेंडा बन गईं। बंगाल के लोगों के साथ जुड़ने में बीजेपी ने कोई कसर नहीं छोड़ी। ममता बनर्जी ने कहा था कि अगर बीजेपी सत्ता में आई तो हमारी थाली में माछ-भात और अंडा नहीं रहेगा। हालांकि हुआ यह कि खुद ममता बनर्जी की सियासी थाली सत्ता से खाली हो गई।
बीजेपी नेताओं ने माछ-भात खाकर बता दिया कि यह केवल एक चुनावी मुद्दा है। अमित शाह ने यहां तक कह दिया कि बंगाल का मुख्य मंत्री कोई माछ भात खाने वाला बंगाली ही बनेगा। बता दें कि माछ भात बंगाल की परंपरा से जुड़ा हुआ है। शक्ति पूजा के दौरान इसे महाप्रसाद के तौर पर खाया जाता है। हालांकि यह संस्कृति उत्तर भारत में नहीं है। उत्तर भारत में पूजा-पाठ में किसी भी तरह के मांसाहार से परहेज किया जाता है। बीजेपी यह साबित करने में कामयाब हो गई कि वह बंगाली संस्कृति और खानपान की दुश्मन नहीं है।
दूसरे चरण में छा गई झालमुड़ी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब झारग्राम में झालमुड़ी खाई तो लोग बीजेपी के साथ कनेक्ट हो गए। पीएम मोदी ने प्याज भी खाने से परहेज नहीं किया। दूसरे चरण के चुनाव में झालमुड़ी एक बड़ा जुमला बन चुका था। वहीं बीजेपी की जबरदस्त जीत के बाद भी खूब झालमुड़ी बांटी गई। 19 अप्रैल को चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री मोदी का झाड़ग्राम की एक दुकान से झालमुड़ी खरीदने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।
वीडियो में दुकानदार के मना करने पर भी मोदी ने पैसे देने पर जोर दिया था। इसे लेकर तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने इसे ‘नाटक’ करार दिया था। वहीं भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने 21 अप्रैल को कहा था कि प्रधानमंत्री का झालमुड़ी खरीदना बंगाल चुनावों पर असर डालेगा।


