पहली कार खरीदने वाले युवा बढ़ रहे ऊपर के सेगमेंट की ओर, कीमत के साथ पूरी वैल्यू पर नजर: कोटक प्राइम
फाइनेंसिंग की सुविधा, दोबारा बेचने पर अच्छी कीमत मिलने के भरोसे और मॉडलों के ज्यादा विकल्पों से बदली तस्वीर, युवा कम उम्र में कार ले रहे हैं, ज्यादा खर्च कर रहे हैं और बेहतर फीचर वाली गाड़ियां चुन रहे हैं
पहली कार को लेकर भारत के युवाओं की सोच बदल रही है। पिछली पीढ़ियों के लिए पहली कार ज्यादातर आने-जाने का साधन होती थी। उसे पाई-पाई का हिसाब लगाकर खरीदा जाता था और सबसे बड़ा सवाल कीमत का होता था। आज बहुत से युवा पहली कार खरीदते समय अपनी जीवनशैली को भी ध्यान में रखते हैं और यह भी देखते हैं कि खर्च किए गए पैसे का पूरा मोल मिले। वे कम उम्र में कार खरीद रहे हैं, ज्यादा पैसा लगा रहे हैं और ऐसी गाड़ी चाहते हैं जो पहले दिन से कई तरह की जरूरतों में काम आए।
कोटक महिंद्रा प्राइम लिमिटेड (कोटक प्राइम) के मुताबिक, पच्चीस के आसपास से लेकर तीस के शुरुआती सालों तक की उम्र में पहली कार खरीदने वाले लोग अपनी पहली गाड़ी पर पहले के खरीदारों के मुकाबले करीब दोगुना खर्च कर रहे हैं। दस साल पहले पहली कार आम तौर पर कोई एंट्री-लेवल गाड़ी होती थी, जिसकी कीमत 1.5 लाख से 2.5 लाख रुपये के बीच रहती थी। आज बहुत से युवा 5 लाख से 8 लाख रुपये की गाड़ी से शुरुआत कर रहे हैं। कई तो बेहतर फीचर वाले वेरिएंट, कॉम्पैक्ट एसयूवी या मिड-सेगमेंट कार के लिए अपना बजट इससे भी आगे ले जा रहे हैं। इसकी वजह यह है कि सुरक्षा, आराम, टेक्नोलॉजी, सड़क पर गाड़ी की धाक और लंबे समय तक उसके काम आने को लेकर लोगों की उम्मीदें बढ़ गई हैं।
कोटक महिंद्रा प्राइम लिमिटेड के एमडी और सीईओ सूरज राजप्पन ने कहा, “पहली कार की श्रेणी में काफी बदलाव आया है और इसका असर पूरे ऑटो बाजार पर पड़ रहा है। पहली कार खरीदने वालों की तस्वीर साफ तौर पर बदल रही है। युवा पहले के मुकाबले जल्दी बाजार में आ रहे हैं। पहली कार के साथ वे गाड़ी का मालिक बनने से आगे की सोचते हैं। उनकी कोशिश रहती है कि जो ईएमआई आराम से चुका सकें, उसमें जितनी अच्छी गाड़ी मिल सकती है, वह मिले। वे जल्दी कार खरीद रहे हैं, ज्यादा खर्च कर रहे हैं, बड़ी और बेहतर फीचर वाली गाड़ियां ले रहे हैं और फाइनेंसिंग का समझदारी से इस्तेमाल करके अपनी चाहत और जेब के बीच तालमेल बिठा रहे हैं।”
पिछले कुछ सालों में कार कंपनियों ने युवाओं के सामने विकल्पों की झड़ी लगा दी है। कॉम्पैक्ट एसयूवी, ढेरों फीचर वाले मॉडल और बेहतर सुविधाओं वाले वैरिएंट, हर तरफ चुनने के लिए पहले से कहीं ज्यादा गाड़ियां हैं। सुरक्षा, इंफोटेनमेंट, कनेक्टिविटी और सुविधा के जो फीचर कभी ऊंचे सेगमेंट की कारों में ही दिखते थे, अब पहली कार खरीदते समय ही उन पर बात होने लगी है। युवा चाहते हैं कि उनकी पहली कार से दफ्तर आना-जाना भी हो, वीकेंड पर घूमना भी, परिवार के काम भी निपटें, लंबे रोड ट्रिप भी हों और अपनी मर्जी से कहीं भी आने-जाने की आजादी भी मिले। इसलिए स्वाभाविक है कि उनकी पसंद ज्यादा दमदार गाड़ियों की तरफ जा रही है।
श्री राजप्पन ने कहा, “पहली कार के मामले में ग्राहक अब ज्यादा वैल्यू वाली गाड़ियों की तरफ बढ़ रहे हैं। युवा ग्राहक कीमत के साथ-साथ जगह, सुरक्षा, टेक्नोलॉजी, रीसेल वैल्यू और ईएमआई कितनी आसानी से चुकेगी, इन सब बातों को तौलकर फैसला करते हैं। खरीदारी का यह तरीका पहले से बिल्कुल अलग है।”
इस बदलाव की एक बड़ी वजह पुरानी गाड़ियां बेचने वाले संगठित प्लेटफॉर्म्स का बढ़ना और सेकंड हैंड कारों को लेकर लोगों का बढ़ता भरोसा है। अच्छी हालत वाली पुरानी एसयूवी या मिड-साइज कार की ईएमआई अक्सर नई एंट्री-लेवल कार की ईएमआई के आसपास ही पड़ती है। इससे हर महीने का खर्च ज्यादा बढ़ाए बिना ऊपर के सेगमेंट की गाड़ी पहुंच में लगने लगती है। सर्टिफाइड जांच, वारंटी, ऑनलाइन गाड़ी ढूंढने की सुविधा और साफ-साफ बताई गई कीमतों ने भी सेकंड हैंड कार खरीदने को लेकर लोगों की बरसों पुरानी हिचक कुछ हद तक कम की है।
इस पूरे बदलाव में फाइनेंसिंग की भूमिका सबसे अहम है। कोटक प्राइम ने देखा है कि पहली कार के लिए लिए जा रहे लोन की रकम बढ़ रही है। पांच से सात साल जैसी लंबी अवधि के लोन लेने में लोग अब ज्यादा सहज हैं और युवा कर्जदार समय पर किस्तें चुकाने में काफी अनुशासित हैं। पहली बार कार खरीदने वाले बहुत से लोगों के लिए अब ईएमआई ही यह तय करती है कि वे कौन सी गाड़ी ले सकते हैं। अगर महीने की किस्त आराम से चुकाने लायक रहे, तो वे एक या दो सेगमेंट ऊपर की ऐसी गाड़ी लेने को भी तैयार हैं, जो उनके हिसाब से ज्यादा लंबे समय तक बेहतर साथ देगी।
यह रुझान देश में आ रहे बड़े सामाजिक और आर्थिक बदलावों की भी झलक है। युवा पेशेवर कम उम्र में कमाने लगे हैं, ज्यादा घरों में दो लोग कमा रहे हैं, शहरों में आने-जाने की जरूरतें बढ़ी हैं और घूमने-फिरने, आराम और सुरक्षा को लेकर लोगों की चाहत भी बढ़ी है। इस पीढ़ी के लिए पहली कार का मतलब आने-जाने के साधन की शुरुआत से कहीं आगे जाता है। कई बार यह उनकी आर्थिक मजबूती और जिंदगी में आगे बढ़ने का पहला बड़ा सबूत होती है।


