Tuesday, July 14, 2026
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Chilgoza Farming: भारत में कैसे उगा सकते हैं पाकिस्तान का चिलगोजा, एक फसल से कितनी कमाई?


Chilgoza Farming: काजू, बादाम और पिस्ता जैसे ड्राई फ्रूट्स के बारे में तो लगभग हर कोई जानता ही होगा, लेकिन क्या आप चिलगोजा के बारे में जानते हैं, जिसे दुनिया के सबसे महंगे और प्रीमियम सूखे मेवों गिना जाता है. भारत के बाजार में इसकी अच्छी क्वालिटी वाली किस्म 7 से 10 रुपये प्रति किलो तक बिकती है, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी इसकी भारी मांग रहती है. यही वजह है कि इसे कई जगह सफेद सोना भी कहा जाता है. चिलगोजा मुख्य रूप से अफगानिस्तान, पाकिस्तान और उत्तरी पश्चिमी हिमालय क्षेत्र का उत्पाद है.

पाकिस्तान में इसकी बड़ी मात्रा बलूचिस्तान, उत्तर और दक्षिण वजीरिस्तान, शेरानी, झोब, चित्राल, कोहिस्तान और गिलगित बाल्टिस्तान जैसे जंगलों में होती है. वहीं भारत में इसका प्राकृतिक विस्तार हिमाचल प्रदेश के किन्नौर और जम्मू कश्मीर के ऊंचाई वाले इलाकों तक सीमित है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि पाकिस्तान का चिलगोजा भारत में कैसे उगा सकते हैं और एक फसल से कितनी कमाई होती है. 

भारत में कैसे उगा सकते हैं चिलगोजा? 

चिलगोजा का पेड़ सामान्य जलवायु में नहीं उगता, इसे ठंडी और शुष्क पर्वतीय जलवायु की जरूरत होती है. यह समुद्र तल से लगभग 1800 से 2600 मीटर की ऊंचाई वाले क्षेत्र में बेहतर बढ़ता है. जहां गर्मियां हल्की और हल्की सर्दियां ठंडी होती है. यही कारण है कि भारत में इसकी खेती केवल हिमालय क्षेत्र में ही की जाती है. चिलगोजा के पेड़ अच्छी जल निकासी वाली रेतीली या बजरी मिश्रित दोमट मिट्टी में विकसित होते हैं. इन्हें भरपूर धूप चाहिए और पर्याप्त पानी का जमाव बिल्कुल पसंद नहीं होता. शुरुआती 2 से 3 सालों तक नियमित सिंचाई की जरूरत होती है, लेकिन पेड़ स्थापित होने के बाद यह सूखे को भी सहन कर सकता है. 

बीज से तैयार होता है पौधा 

चिलगोजे की खेती मुख्य रूप से बीजों से की जाती है. ताजे बीजों को ठंडे वातावरण में तैयार किया जाता है और छोटे पौधों को शुरुआती अवस्था में ही स्थायी स्थान पर लगा देना बेहतर माना जाता है. एक्सपर्ट्स के अनुसार बड़े पौधों की दूसरी जगह लगाने पर उनकी जड़े आसानी से स्थापित नहीं हो पाती है, जिससे पौधे का विकास भी प्रभावित हो जाता है. यह एक धीमी गति से बढ़ने वाला पेड़ है. चिलगोजे के पौधे में फल आने में करीब 8 से 10 साल लगते हैं, इसलिए इसकी खेती लंबी लंबे समय का निवेश मानी जाती है. वहीं बेहतर उत्पादन के लिए एक से ज्यादा पेड़ लगाना जरूरी माना जाता है ताकि परागण अच्छी तरह हो सके. 

कब की जाती है चिलगोजे की कटाई? 

चिलगोजा के पेड़ 10 से 20 मीटर ऊंचे होते हैं, उनके फल को शंकु कहा जाता है. फल पकने के बाद इन्हें ऊंचे पेड़ों से हाथों से तोड़ा जाता है. कई बार पेड़ खड़ी ढलान पर होने की वजह से यह काम खतरे से भरा साबित हो सकता है और हादसे भी हो  जाते हैं. शंकु को तोड़ने के बाद करीब 15 से 20 दिन तक धूप में सुखाया जाता है, इसके बाद हाथ से बीज निकाला जाता है, पूरी प्रक्रिया में मशीन का इस्तेमाल बहुत कम होता है, इसलिए इसमें काफी मेहनत लगती है. 

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एक फसल से कितनी हो सकती है कमाई? 

चिलगोजा की कीमत इसकी गुणवत्ता, आकार और बाजार की मांग पर निर्भर करती है. भारत में अच्छी क्वालिटी वाले चिलगोजा की कीमत 7 से 10 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाती है और कुछ कंडीशन में इससे भी ज्यादा दाम मिलते हैं. पाकिस्तान में भी इसकी कीमत मौसम और क्वालिटी के अनुसार बदलती रहती है. पाकिस्तान की स्थानीय मंडी में कच्चे चिलगोजे की कीमत को हजार रुपये किलो रहती है, जबकि बड़े शहरों में भुने हुए और बेहतर गुणवत्ता वाले चिलगोजे  के दाम काफी ज्यादा होते हैं. अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीन इसकी सबसे बड़ी मंडियों में शामिल है, जहां चिलगोजा के आकार के आधार पर कीमत तय की जाती है.

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