Ethanol Plant Setup: देश में बढ़ते प्रदूषण और ईंधन की बढ़ती मांग के बीच एथेनॉल उत्पादन को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है. सरकार का लक्ष्य पेट्रोल में 20 फीसदी तक एथेनॉल मिलाने का है, जिससे न सिर्फ प्रदूषण कम होगा, बल्कि किसानों के आय बढ़ाने का रास्ता भी खुलेगा. खासतौर पर गन्ना किसानों के लिए यह एक बड़ा अवसर बनकर आया है. क्योंकि एथेनॉल का उत्पादन गन्ने, शीरे और अनाज से किया जाता है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि गन्ना किसान एथेनॉल प्लांट कैसे लगा सकते हैं और सरकार इसके लिए कितनी सब्सिडी देती है?
एथेनॉल प्लांट क्यों है जरूरी?
भारत में सड़क परिवहन का बड़ा हिस्सा अभी भी पेट्रोल और डीजल जैसे फ्यूल पर निर्भर करता है. ऐसे में एथेनॉल जैसे बायोफ्यूल का उपयोग बढ़ाना जरूरी हो गया है. एथेनॉल पेट्रोल के साथ मिलकर इस्तेमाल किया जाता है, जिससे प्रदूषण कम होता है और ईंधन की लागत भी घटती है. सरकार का मानना है कि एथेनॉल उत्पादन बढ़ने से किसानों की फसलों की मांग बढ़ेगी. ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा होंगे और देश की तेल आयात पर निर्भरता भी कम होगी.
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गन्ना किसान कैसे लगा सकते हैं एथेनॉल प्लांट?
एथेनॉल प्लांट लगाने के लिए किसानों को कुछ जरूरी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है. इसके लिए जमीन, मशीनरी, और कच्चे माल की व्यवस्था करनी होती है. एथेनॉल उत्पादन की प्रक्रिया में मुख्य रूप से फर्मेंटेशन और डिस्टिलेशन शामिल होते हैं. गन्ने का रस या मोलासेस को पानी और यीस्ट में मिलाकर फर्मेंटेशन किया जाता है, जिससे अल्कोहल बनता है. इसके बाद आसवन प्रक्रिया के जरिए एथेनॉल तैयार किया जाता है. प्लांट लगाने के लिए किसानों को जमीन के कागजात, पर्यावरण मंजूरी, कंपनी रजिस्ट्रेशन से जुड़े डॉक्यूमेंट और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों से एथेनॉल सप्लाई के लिए अनुमति लेनी होती है.
सरकार से क्या मिलती है मदद?
एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार कई तरह की सहायता देती है. इसमें ब्याज सब्सिडी, आसान लोन और कुछ टैक्स में राहत शामिल है. सरकार ने एथेनॉल पर जीएसटी दर भी घटा रखी है, जिससे निवेश को बढ़ावा मिलता है. इसके अलावा एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम के तहत कंपनियों को उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन दिया जा रहा है. वहीं एथेनॉल उत्पादन से गन्ना किसानों को सबसे बड़ा फायदा यह है कि उनकी फसल की मांग बढ़ेगी और भुगतान में देरी की समस्या भी कम होगी. इसके अलावा फसल अवशेष और एक्स्ट्रा उत्पादन का भी इस्तेमाल एथेनॉल बनाने में किया जा सकता है, जिससे किसानों को अतिरिक्त आय का सोर्स भी मिल जाएगा.
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