Wednesday, July 15, 2026
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Gardening Tips: क्या गमले की मिट्टी में रेत मिलाने से होता है फायदा? जानिए आपके पौधे के लिए नुकसान है या फायदा


ऐसे पौधे जिन्हें ज्यादा पानी पसंद नहीं होता है, उनके लिए रेत उपयोगी मानी जाती है. कैक्टस, सक्यूलेंट,  रोज मेरी और थाइम जैसे पौधों में रेत मिलाने से अतिरिक्त पानी जल्दी निकल जाता है और जड़ों के सड़ने की संभावना कम हो जाती है. अगर मिट्टी बहुत भारी या चिकनी है, तो उसमें थोड़ी रेत मिलाने से उसकी बनावट हल्की हो सकती है.

ऐसे पौधे जिन्हें ज्यादा पानी पसंद नहीं होता है, उनके लिए रेत उपयोगी मानी जाती है. कैक्टस, सक्यूलेंट, रोज मेरी और थाइम जैसे पौधों में रेत मिलाने से अतिरिक्त पानी जल्दी निकल जाता है और जड़ों के सड़ने की संभावना कम हो जाती है. अगर मिट्टी बहुत भारी या चिकनी है, तो उसमें थोड़ी रेत मिलाने से उसकी बनावट हल्की हो सकती है.

वहीं आजकल बाजार में मिलने वाली अच्छी पॉटिंग मिक्स पहले से ही इस तरह तैयार होती है कि उसमें नमी और जल निकासी का संतुलन बना रहे. ऐसे में बिना जरूरत रेत मिलाने से मिट्टी बहुत जल्दी सूखने लगती है. इसका असर खासकर उन पौधों पर पड़ता है, जिन्हें लगातार हल्की नमी चाहिए होती है. जैसे कई इनडोर  और ट्रॉपिकल पौधे.

वहीं आजकल बाजार में मिलने वाली अच्छी पॉटिंग मिक्स पहले से ही इस तरह तैयार होती है कि उसमें नमी और जल निकासी का संतुलन बना रहे. ऐसे में बिना जरूरत रेत मिलाने से मिट्टी बहुत जल्दी सूखने लगती है. इसका असर खासकर उन पौधों पर पड़ता है, जिन्हें लगातार हल्की नमी चाहिए होती है. जैसे कई इनडोर और ट्रॉपिकल पौधे.

इसके अलावा पौधे में ज्यादा रेत मिलाने के भी कई नुकसान होते हैं. पौधे की मिट्टी में ज्यादा रेत मिलाने से मिट्टी तेजी से सूखने लगती है. पौधों को बार-बार पानी देना पड़ सकता है, गमला भारी हो जाता है और उसे उठाना मुश्किल होता है. पानी के साथ पोषक तत्व भी जल्दी बाहर निकाल सकते हैं.

इसके अलावा पौधे में ज्यादा रेत मिलाने के भी कई नुकसान होते हैं. पौधे की मिट्टी में ज्यादा रेत मिलाने से मिट्टी तेजी से सूखने लगती है. पौधों को बार-बार पानी देना पड़ सकता है, गमला भारी हो जाता है और उसे उठाना मुश्किल होता है. पानी के साथ पोषक तत्व भी जल्दी बाहर निकाल सकते हैं.

इसके अलावा बागवानी के लिए हमेशा मोटे दानों वाली सफेद रेत ही चुननी चाहिए. बहुत महीन रेत मिट्टी को सख्त बन सकती है, जबकि समुद्र की रेत में मौजूद नमक जड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है. इसलिए साधारण निर्माण वाली या नमकीन रेत का उपयोग करने से बचना बेहतर माना जाता है.

इसके अलावा बागवानी के लिए हमेशा मोटे दानों वाली सफेद रेत ही चुननी चाहिए. बहुत महीन रेत मिट्टी को सख्त बन सकती है, जबकि समुद्र की रेत में मौजूद नमक जड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है. इसलिए साधारण निर्माण वाली या नमकीन रेत का उपयोग करने से बचना बेहतर माना जाता है.

एक्सपर्ट के अनुसार पौधों के लिए अगर रेत ना मिले तो पर्लाइट, वर्मीकुलाइट या अच्छी तरह तैयार कंपोस्ट भी जल निकासी और मिट्टी की बनावट सुधारने के लिए अच्छे ऑप्शन हो सकते हैं. यह सामान मिट्टी को हल्का बनता है और जड़ों तक हवा पहुंचने में मदद करता है.

एक्सपर्ट के अनुसार पौधों के लिए अगर रेत ना मिले तो पर्लाइट, वर्मीकुलाइट या अच्छी तरह तैयार कंपोस्ट भी जल निकासी और मिट्टी की बनावट सुधारने के लिए अच्छे ऑप्शन हो सकते हैं. यह सामान मिट्टी को हल्का बनता है और जड़ों तक हवा पहुंचने में मदद करता है.

वहीं पौधे में रेत मिलाने से पहले मिट्टी की स्थिति और पौधे की जरूरत को समझना जरूरी है. शुरुआत में कम मात्रा में रेत मिलकर इसका असर देखना बेहतर रहता है. कैक्टस और सक्यूलेंट जैसे पौधों में रेत की मात्रा ज्यादा रखी जा सकती है, जबकि सामान्य पौधों और इनडोर पौधों में इसे सीमित मात्रा में ही मिलना चाहिए.

वहीं पौधे में रेत मिलाने से पहले मिट्टी की स्थिति और पौधे की जरूरत को समझना जरूरी है. शुरुआत में कम मात्रा में रेत मिलकर इसका असर देखना बेहतर रहता है. कैक्टस और सक्यूलेंट जैसे पौधों में रेत की मात्रा ज्यादा रखी जा सकती है, जबकि सामान्य पौधों और इनडोर पौधों में इसे सीमित मात्रा में ही मिलना चाहिए.

Published at : 15 Jul 2026 08:29 AM (IST)

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