Geranium farming Tips : आज भी ज्यादातर किसान पारंपरिक फसलों जैसे गेहूं, धान या मक्का पर निर्भर होकर खेती करते हैं. इन फसलों से इनकम सीमित रहती है, जिससे किसानों को ज्यादा फायदा नहीं मिल पाता है, लेकिन बदलते समय के साथ अब किसान नई और नकदी फसलों की ओर भी ध्यान दे रहे हैं. ऐसी ही एक फसल जिरेनियम (Geranium) है, जिसे गरीबों का गुलाब भी कहा जाता है. इसकी खुशबू गुलाब जैसी होती है, लेकिन खेती में लागत कम और मुनाफा ज्यादा होता है. इससे निकलने वाला तेल बहुत महंगा बिकता है और इसका यूज परफ्यूम, कॉस्मेटिक्स और दवाइयों में किया जाता है. यही कारण है कि इसकी खेती किसानों के लिए कमाई का अच्छा जरिया बन सकती है. तो आइए जानते हैं कि किसान जिरेनियम की खेती कैसे करें.
क्या है जिरेनियम?
जिरेनियम एक खुशबूदार पौधा है, जिसके पत्तों और फूलों से तेल निकाला जाता है. इस तेल की खुशबू गुलाब जैसी होती है, इसलिए इसे गरीबों का गुलाब कहा जाता है. इसका यूज कई जगहों पर होता है जैसे परफ्यूम और इत्र बनाने में, कॉस्मेटिक्स और साबुन में, एरोमाथेरेपी में, साथ ही आयुर्वेदिक और औषधीय उत्पादों में भी यूज किया जाता है.
जिरेनियम के फायदे
जिरेनियम का तेल सिर्फ खुशबू के लिए ही नहीं, बल्कि हेल्थ के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. यह स्किन की समस्याएं जैसे मुंहासे और एक्जिमा में मददगार होता है. साथ ही सूजन कम करने में मदद करता है. इसके अलावा मानसिक तनाव और तंत्रिका संबंधी समस्याओं में यूजफुल माना जाता है. यह बढ़ती उम्र के असर को कम करने में मदद करता है.
क्यों फायदेमंद है जिरेनियम की खेती?
भारत में है जिरेनियम के तेल की मांग बहुत ज्यादा है, जबकि उत्पादन काफी कम होता है, जिससे इसकी कीमत ऊंची बनी रहती है. जिरेनियम के तेल की कीमत करीब 12,000 से 20,000 प्रति लीटर तक मिल सकती है. इसकी खेती में प्रति हेक्टेयर लगभग 80,000 का खर्च आता है, जबकि इससे 2.5 से 3 लाख तक की आय हो सकती है. किसान को 1.5 लाख या उससे ज्यादा का मुनाफा मिल सकता है. अगर किसान सही तकनीक और देखभाल के साथ इसकी खेती करें, तो यह पारंपरिक फसलों की तुलना में कहीं ज्यादा फायदा देने वाली फसल साबित हो सकती है.
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किसान जिरेनियम की खेती कैसे करें?
1. जिरेनियम की खेती के लिए सही जलवायु और मिट्टी चुनें. इसके लिए 15°C से 30°C तापमान और 100-150 सेमी बारिश अच्छी रहती है. बलुई दोमट और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी सबसे बेहतर होती है. ध्यान रखें कि खेत में पानी जमा न हो.
2. इसके बाद अच्छी किस्म का चुनाव करें. अल्जीरियन, बोरबन, इजिप्सियन और सिम-पवन जैसी किस्में ज्यादा उपज और अच्छे तेल के लिए उपयुक्त मानी जाती हैं.
3. अब खेत की 2-3 बार जुताई करें, मिट्टी को भुरभुरा बनाएं और खेत को समतल करें. साथ ही पानी निकासी की अच्छी व्यवस्था जरूर रखें.
4. इसके साथ ही कटिंग से पौधा तैयार करें, जो 30-45 दिन में तैयार हो जाती है. पौधों को 30-50 सेमी दूरी पर लगाएं और रोपाई से पहले फफूंदनाशक से उपचार करें.
5. इसके बाद प्रति हेक्टेयर 8-10 टन गोबर की खाद डालें और जरूरत अनुसार उर्वरक दें. पहली सिंचाई तुरंत करें, फिर 5-6 दिन के गैप पर पानी दें, लेकिन ज्यादा पानी से बचें.
6. इस फसल में कम रोग लगते हैं, लेकिन पत्ती खाने वाले कीट या फफूंदी से बचाव के लिए समय-समय पर दवा का छिड़काव करें.
कटाई कब करें?
जिरेनियम की पहली कटाई आमतौर पर पौधे लगाने के 5-6 महीने बाद की जाती है, जब उसकी पत्तियां पूरी तरह परिपक्व हो जाती हैं. कटाई के समय पत्तियां न तो बहुत कच्ची हों और न ही खराब या पीली हों, क्योंकि इससे तेल की क्वालिटी प्रभावित होती है. कटाई के बाद इन पत्तियों से डिस्टिलेशन प्रक्रिया से सुगंधित तेल निकाला जाता है, जो बाजार में अच्छी कीमत पर बिकता है. इसलिए सही समय पर कटाई करना अच्छी पैदावार और ज्यादा मुनाफे के लिए बहुत जरूरी होता है.
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