जे.सी. बोस ग्रांट देश के बड़े रिसर्च सम्मानों में से एक है। इसे अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) की ओर से दिया जाता है। यह सम्मान 45 से 65 वर्ष की उम्र के उन वैज्ञानिकों को मिलता है, जिन्होंने अपने क्षेत्र में बेहतरीन रिसर्च की है और विज्ञान एवं तकनीक के विकास में लगातार योगदान दे रहे हैं।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे (IIT Bombay) के चार प्रोफेसरों को प्रतिष्ठित जे.सी. बोस ग्रांट (J.C. Bose Grant) के लिए चुना गया है। यह देश के सक्रिय वैज्ञानिकों को दिए जाने वाले प्रमुख रिसर्च सम्मानों में से एक है। यह सम्मान उन वैज्ञानिकों को दिया जाता है जिन्होंने लंबे समय तक विज्ञान और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया हो और जो आज भी अत्याधुनिक शोध कार्यों का नेतृत्व कर रहे हों। अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) की सिफारिश के बाद प्रो. एम. रविकांत, प्रो. दीपांकर चौधरी, प्रो. रुचि आनंद और प्रो. देबब्रत मैती का इस सम्मान के लिए चयन किया गया। IIT Bombay ने भी चारों प्रोफेसरों को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी है। चलिए जानते हैं कि इन प्रोफेसर्स की उपलब्धियां क्या-क्या है और जे.सी. बोस ग्रांट के बारे में जानेंगे।
सबसे पहले आपको उन 4 प्रोफेसर्स के बारे में बताते हैं, जिनको ये सम्मान हासिल हुआ है-
प्रो. एम. रविकांत
IIT Bombay के केमिस्ट्री विभाग से जुड़े हैं। पोर्फिरिन और मैक्रोसाइक्लिक मॉलिक्यूल्स पर महत्वपूर्ण रिसर्च के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखते हैं। उनका शोध केमिकल सेंसर, फोटोकेमिस्ट्री और एडवांस्ड फंक्शनल मटेरियल्स जैसे क्षेत्रों में उपयोगी है। इंडियन एकेडमी ऑफ साइंसेज और नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज, इंडिया के फेलो हैं। आधुनिक इनऑर्गेनिक और सुप्रामॉलिक्यूलर केमिस्ट्री में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
प्रो. दीपांकर चौधरी
IIT Bombay के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर हैं। जियोटेक्निकल अर्थक्वेक इंजीनियरिंग के विशेषज्ञ हैं। भूकंप के दौरान मिट्टी के व्यवहार, मजबूत नींव और सुरक्षित इंफ्रास्ट्रक्चर पर रिसर्च करते हैं। कंबाइंड पाइल-राफ्ट फाउंडेशन की अंतरराष्ट्रीय डिजाइन गाइडलाइंस में योगदान दिया। भारत के इंजीनियरिंग कोड IS: 19117 को विकसित करने में अहम भूमिका निभाई।
प्रो. रुचि आनंद
IIT Bombay के केमिस्ट्री विभाग की प्रमुख हैं। उनका शोध स्ट्रक्चरल बायोकैमिस्ट्री, बायोसेंसर और एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस पर केंद्रित है। उनकी रिसर्च से यह समझने में मदद मिलती है कि बैक्टीरिया दवाओं के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता कैसे विकसित करते हैं। TWAS और INSA की फेलो हैं। उन्हें नेशनल वुमन बायोसाइंटिस्ट अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है।
प्रो. देबब्रत मैती
देश के प्रमुख सिंथेटिक ऑर्गेनिक केमिस्ट्री शोधकर्ताओं में शामिल हैं। उनका प्रमुख शोध C-H बॉन्ड एक्टिवेशन पर है। उनकी रिसर्च से जटिल दवा के अणुओं को अधिक आसानी और कुशलता से तैयार करने में मदद मिलती है। उन्हें प्रतिष्ठित शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार मिल चुका है। अंतरराष्ट्रीय केमिस्ट्री जर्नल Synlett के एडिटर-इन-चीफ भी हैं।
जे.सी. बोस ग्रांट क्या है?
जे.सी. बोस ग्रांट देश के प्रतिष्ठित रिसर्च सम्मानों में से एक है। इसे अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) की ओर से दिया जाता है। यह सम्मान 45 से 65 वर्ष की उम्र के उन वैज्ञानिकों को मिलता है, जिन्होंने अपने क्षेत्र में बेहतरीन रिसर्च की है और विज्ञान एवं तकनीक के विकास में लगातार योगदान दे रहे हैं। इस ग्रांट के तहत वैज्ञानिकों को 5 साल तक हर साल 25 लाख रुपये की रिसर्च राशि दी जाती है। इसके अलावा, उनकी संस्था को रिसर्च से जुड़ी सुविधाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए अलग से फंडिंग भी मि
यह सिर्फ आर्थिक मदद नहीं है, बल्कि वैज्ञानिकों के काम और उनकी उपलब्धियों को मिलने वाली बड़ी पहचान भी है। इसमें वैज्ञानिकों के रिसर्च योगदान के साथ-साथ नई पीढ़ी के शोधकर्ताओं को मार्गदर्शन देने में उनकी भूमिका को भी महत्व दिया जाता है। इस साल IIT Bombay के चार प्रोफेसरों को एक साथ J.C. Bose Grant के लिए चुना जाना संस्थान के लिए बड़ी उपलब्धि है। चारों प्रोफेसरों का रिसर्च अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़ा है, जिसमें सुरक्षित इंफ्रास्ट्रक्चर, आधुनिक केमिस्ट्री, एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस और नई दवाओं की खोज जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं।


