Tuesday, July 7, 2026
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Low cost farming: ये हैं कम लागत वाली 10 फसलें, जो बदल सकती हैं किसानों की जिंदगी


कम लागत और बड़े मुनाफे की बात करें तो सबसे पहले मशरूम की खेती का नाम आता है. माना जाता है कि यह फसल कम जगह, कम लागत और जल्दी मुनाफा देने के लिए मशहूर है.  साथ ही यह फसल उन किसानों के लिए भी बेहतरीन विकल्प माना जाता है जिनके पास खेती करने के लिए ज्यादा जमीन भी नहीं है, क्योंकि इस खेती को करने के लिए किसान को केवल 300 वर्ग फूट का एक कमरा ही काफी होता है. बस जरूरी है तो तापमान और नमी का खास ध्यान रखना.

कम लागत और बड़े मुनाफे की बात करें तो सबसे पहले मशरूम की खेती का नाम आता है. माना जाता है कि यह फसल कम जगह, कम लागत और जल्दी मुनाफा देने के लिए मशहूर है. साथ ही यह फसल उन किसानों के लिए भी बेहतरीन विकल्प माना जाता है जिनके पास खेती करने के लिए ज्यादा जमीन भी नहीं है, क्योंकि इस खेती को करने के लिए किसान को केवल 300 वर्ग फूट का एक कमरा ही काफी होता है. बस जरूरी है तो तापमान और नमी का खास ध्यान रखना.

इसके बाद नाम आता है हल्दी, अदरक और लहसुन जैसी मसाला फसलों का. हल्दी की फसल तैयार होने में करीब 8 से 9 महीने का समय लगता है. वहीं अदरक और लहसुन की मांग रसोई में हमेशा बनी रहती है, इसलिए इनकी खेती में घाटे का खतरा भी काफी कम रहता है. मसालों की खेती की एक खास बात यह भी है कि भारतीय मसालों की केवल देश में ही नहीं बल्कि दुनिया भर में डिमांड है, इसलिए देश में इस खेती की मांग हमेशा बनी रहती है.

इसके बाद नाम आता है हल्दी, अदरक और लहसुन जैसी मसाला फसलों का. हल्दी की फसल तैयार होने में करीब 8 से 9 महीने का समय लगता है. वहीं अदरक और लहसुन की मांग रसोई में हमेशा बनी रहती है, इसलिए इनकी खेती में घाटे का खतरा भी काफी कम रहता है. मसालों की खेती की एक खास बात यह भी है कि भारतीय मसालों की केवल देश में ही नहीं बल्कि दुनिया भर में डिमांड है, इसलिए देश में इस खेती की मांग हमेशा बनी रहती है.

भारत एक धार्मिक देश हैं, जहां गेंदे के फूलों की मांग सालों साल बनी रहती है. यहां पर समय-समय पर शादी-ब्याह से लेकर पूजा पाठ तक हर जगह गेंदे के फूल कि मांग कभी भी कम नहीं होती. यही वजह है कि कई छोटे किसान इसकी तरफ रूख कर रहे हैं. साथ ही कम जमीन में भी इसकी खेती से अच्छी कमाई हो जाती है और फसल जल्दी तैयार भी हो जाती है.

भारत एक धार्मिक देश हैं, जहां गेंदे के फूलों की मांग सालों साल बनी रहती है. यहां पर समय-समय पर शादी-ब्याह से लेकर पूजा पाठ तक हर जगह गेंदे के फूल कि मांग कभी भी कम नहीं होती. यही वजह है कि कई छोटे किसान इसकी तरफ रूख कर रहे हैं. साथ ही कम जमीन में भी इसकी खेती से अच्छी कमाई हो जाती है और फसल जल्दी तैयार भी हो जाती है.

किसान पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, मेथी और धनिया की खेती करके भी मुनाफा कमा रहे हैं. इनकी सबसे बड़ी खासियत यही है कि ये सिर्फ 25 से 40 दिन में ही तैयार हो जाती हैं, यानी किसान को बहुत जल्दी अपनी मेहनत का फल मिल जाता है. इन्हें उगाने में लागत भी बहुत कम आती है. इसलिए नए किसानों के लिए भी एक सुरक्षित विकल्प है.

किसान पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, मेथी और धनिया की खेती करके भी मुनाफा कमा रहे हैं. इनकी सबसे बड़ी खासियत यही है कि ये सिर्फ 25 से 40 दिन में ही तैयार हो जाती हैं, यानी किसान को बहुत जल्दी अपनी मेहनत का फल मिल जाता है. इन्हें उगाने में लागत भी बहुत कम आती है. इसलिए नए किसानों के लिए भी एक सुरक्षित विकल्प है.

पांचवें नंबर पर दलहनी फसलें यानी मूंग और उड़द की खेती. मूंग की फसल करीब 60 से 70 दिन में तैयार हो जाती है और कम पानी में भी अच्छी पैदावार देती है. इसके अलावा मिट्टी की उर्वरता यानी उपजाऊ शक्ति को भी बढ़ाने में मदद करती है. साथ ही उड़द भी कम पानी और कम लागत में तैयार होने वाली फसल है, जिससे किसानों को काफी फायदा होता है.

पांचवें नंबर पर दलहनी फसलें यानी मूंग और उड़द की खेती. मूंग की फसल करीब 60 से 70 दिन में तैयार हो जाती है और कम पानी में भी अच्छी पैदावार देती है. इसके अलावा मिट्टी की उर्वरता यानी उपजाऊ शक्ति को भी बढ़ाने में मदद करती है. साथ ही उड़द भी कम पानी और कम लागत में तैयार होने वाली फसल है, जिससे किसानों को काफी फायदा होता है.

छठे नंबर पर आती हैं सब्जियों की खेती जैसे टमाटर, मिर्च और खीरा जैसी फसल. अगर किसान के पास पानी और मंडी दोनों की सुविधा पास में हो, तो ये सब्जियां सबसे ज्यादा मुनाफा देने वाली फसलों में गिनी जाती हैं. खीरे की फसल करीब 50 दिन में तैयार हो जाती है, जिससे किसान को जल्दी कमाई शुरू हो जाती है. इसके अलावा अगर किसान ड्रिप सिंचाई अपनाते हैं, तो इससे पानी की भी बचत होती है और पैदावार भी 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ जाती है.

छठे नंबर पर आती हैं सब्जियों की खेती जैसे टमाटर, मिर्च और खीरा जैसी फसल. अगर किसान के पास पानी और मंडी दोनों की सुविधा पास में हो, तो ये सब्जियां सबसे ज्यादा मुनाफा देने वाली फसलों में गिनी जाती हैं. खीरे की फसल करीब 50 दिन में तैयार हो जाती है, जिससे किसान को जल्दी कमाई शुरू हो जाती है. इसके अलावा अगर किसान ड्रिप सिंचाई अपनाते हैं, तो इससे पानी की भी बचत होती है और पैदावार भी 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ जाती है.

Published at : 06 Jul 2026 05:03 PM (IST)

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