Wednesday, June 24, 2026
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Patharchatta Farming: फार्म हाउस में कैसे करें पत्थरचट्टा की खेती? इस पौधे से बन सकते हैं लखपति


Patharchatta Farming: आज के समय में किसान जितना गेहूं, धान और सब्जियों की फसल उगाकर मुनाफा कमा रहे हैं, उतना ही वे औषधीय पौधों की खेती करके भी कमा रहे हैं.  साथ ही इससे उनको अच्छा मुनाफा भी मिलता है. इन्हीं औषधियों में से एक औषधि है जिसे किसान उगाकर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं, वह है पत्थरचट्टा, जिसे कलांचो पिन्नाटा या ब्रायोफिलम के नाम से भी जाना जाता है.  यह पौधा दिखने में तो खूबसूरत लगता ही है, लेकिन यह स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद भी होता है. आयुर्वेद के बढ़ते चलन के साथ इस पौधे की मांग भी लगातार बढ़ रही है, जिससे किसानों के लिए यह एक शानदार कमाई का जरिया बन गया है. 

पत्थरचट्टा की खेती शुरू करना है बेहद आसान

पत्थरचट्टा की खेती शुरू करना बेहद आसान है क्योंकि इसके पौधे लगाने के लिए किसी बीज की आवश्यकता नहीं होती, यह पौधा सिर्फ पत्तों से ही उगाया जा सकता है.  इसके लिए आपको नर्सरी या ऑनलाइन से एक पौधा खरीदना होगा, उसके बाद आप इसके पत्तों से जितनी चाहें उतनी खेती बढ़ा सकते हैं. पत्थरचट्टा उगाने के लिए नम मिट्टी की जरूरत होती है.  इसके लिए अच्छी मिट्टी की बात करें तो इसमें 60% दोमट मिट्टी, 20% कोको पीट और 20% रेत मिलाकर पोटिंग मिक्स तैयार किया जाता है, जिससे पौधे की जड़ों को सही पोषण मिलता रहता है. 

यह भी पढ़ेंः Digital Land Records: आपकी खेती कहां-कहां… मोबाइल पर कैसे देख सकते हैं, जान लें पूरा तरीका

देखभाल में भी नहीं आती ज्यादा परेशानी

रोपण के साथ-साथ देखभाल के मामले में भी यह पौधा बहुत आसान साबित होता है. इसे रोजाना कम से कम 4 से 5 घंटे सीधी धूप की जरूरत होती है, और यह अत्यधिक गर्मी सहन कर सकता है लेकिन पाले को बिल्कुल नहीं झेल पाता.  इसलिए ठंड के मौसम में इन्हें घर के भीतर रखना सही होता है. ध्यान रखने वाली बात है कि इन पौधों के लिए 10°C से नीचे का तापमान हानिकारक होता है. साथ ही गर्मियों के मौसम में इन्हें तब ही पानी देना चाहिए जब 2 से 3 इंच गहराई तक मिट्टी सूख जाए, तभी पानी दें.

अगर बात करें इन पौधों से होने वाली कमाई की तो, इन पौधों की ज्यादातर मांग आयुर्वेद में दवा बनाने, हर्बल प्रोडक्ट्स और नर्सरी में होती है.  इसका एक पौधा आसानी से 30 से 50 रुपये में बिक सकता है, और सबसे बड़ी बात यह है कि इस खेती में श्रम और रोग दोनों ही कम लगते हैं, जिसकी वजह से यह आय बढ़ाने के लिए बेहतरीन विकल्प माना जाता है. 



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