Rajasthan Farmer Scheme: कई बार बदलते मौसम का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ता है. दरअसल अचानक मौसम बदलने की वजह से किसानों की साल भर की फसल एकदम से खत्म हो जाती है. कई बार ज्यादा बारिश के चलते तो कई बार बारिश बिल्कुल न होने की चलते किसानों की फसल खराब होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है. जिससे उनकी मेहनत पूरी तरह बर्बाद हो जाती है, लेकिन कई राज्य और केंद्र सरकार किसानों को फसल से जुड़ा मुआवजा देती है. मुआवजे में एक राज्य की सरकार मौसम की मार से फसल खराब होने पर 22,500 तक का मुआवजा देती है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि कहां की सरकार मौसम की मार के चलते फसल खराब होने पर 22,500 तक का मुआवजा देती है और यह पूरी योजना क्या है.
राजस्थान सरकार देती है किसानों को मुआवजा
राजस्थान में खेती पूरी तरह मौसम पर निर्भर मानी जाती है. हर साल लाखों किसान खरीफ और रबी सीजन में फसल बोते हैं, लेकिन कई बार सूखे, अतिवृष्टि, बाढ़, ओलावृष्टि, पाला, शीत लहर, चक्रवात तेज आंधी या कीड़ों के प्रकोप जैसी प्राकृतिक आपदाएं उनकी मेहनत पर पानी फेर देती है. ऐसी परिस्थितियों में किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है. इस समस्या को देखते हुए राजस्थान सरकार किसानों को राहत देने के लिए कृषि आदान अनुदान सहायता योजना चला रही है. इस योजना के तहत प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को फसल नुकसान के आधार पर आर्थिक सहायता दी जाती है, ताकि वह दोबारा खेती शुरू कर सके.
किन किसानों को मिलेगा योजना का लाभ?
इस योजना का लाभ उन किसानों को दिया जाता है, जिनकी खड़ी फसल प्राकृतिक आपदा के कारण कम से कम 33 प्रतिशत या उससे ज्यादा खराब हुई हो. नुकसान का आकलन राजस्व विभाग की ओर से गिरदावरी रिपोर्ट के आधार पर किया जाता है. सर्वे में नुकसान की पुष्टि होने के बाद पात्र किसानों को सहायता राशि देने की प्रक्रिया शुरू की जाती है. सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सहायता केवल उन्हीं किसानों तक पहुंचे, जिन्हें वास्तव में नुकसान हुआ है.
किसानों को नहीं होती है, आवेदन करने की आवश्यकता?
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि किसानों को अलग से आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होती. प्रभावी किसानों की जानकारी संबंधित पटवारी या डीएमआईए पोर्टल पर दर्ज की जाती है. खरीफ फसलों का डेटा 31 मार्च तक और रबी फसलों का डेटा 30 सितंबर तक अपलोड किया जाता है. अगर किसी किसान की फसल खराब हुई है और उसका सर्वे नहीं हुआ तो वह राज गिरदावरी ऐप के जरिए नुकसान की सूचना दे सकता है. इसके अलावा किसान पटवारी, तहसीलदार या जिला कलेक्टर को भी जानकारी देकर सर्वे का अनुरोध कर सकता है.
फसल के प्रकार के अनुसार मिलती है सहायता
राज्य सरकार की ओर से एसडीआरएफ के मानकों के अनुसार सहायता राशि तय की गई है. फसल की कैटेगरी और सिंचाई व्यवस्था के आधार पर किसानों को अलग-अलग आधारों से अनुदान दिया जाता है. वर्षा आधारित फसलों के लिए 8,500 रुपये प्रति हेक्टेयर, सिंचित फसलों के लिए 17,000 रुपये प्रति हेक्टेयर और बारहमासी फसलों के लिए 22,500 रुपये प्रति हेक्टेयर की सहायता दी जाती है. हालांकि योजना के तहत अधिकतम 2 हेक्टेयर भूमि तक की सहायता राशि दी जाती है.
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