Monday, June 1, 2026
Google search engine
Homeकृषि समाचारTobacco Farming: कैसे की जाती है तंबाकू की खेती, इसके लिए कैसे...

Tobacco Farming: कैसे की जाती है तंबाकू की खेती, इसके लिए कैसे मिलता है लाइसेंस? 


Tobacco Farming: आज यानी 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य लोगों को तंबाकू और निकोटिन उत्पादों के खतरे के प्रति जागरूक करना है. इस दिन डॉक्टर और हेल्थ एक्सपर्ट्स तंबाकू से होने वाली गंभीर बीमारियों को लेकर चेतावनी देते हैं. इस दिन का मुख्य उद्देश्य लोगों को तंबाकू के सेवन से होने वाले जानलेवा स्वास्थ्य खतरों, बीमारी और आर्थिक दुष्प्रभाव के बारे में जागरूक करना है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 1987 में इसे मनाने का निर्णय लिया था. 

जहां एक तरफ इस दिन को लेकर लोगों को जागरूक किया जाता है, वहीं दूसरी तरफ भारत में हजारों किसान इसकी खेती से अपनी आजीविका भी चलाते हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर तंबाकू की खेती कैसे की होती है, इसके लिए किसानों को किस तरह की अनुमति लेनी पड़ती है और इसका कारोबार किन नियमों के तहत संचालित होता है.

कैसे की जाती है तंबाकू की खेती?

भारत दुनिया के सबसे बड़े तंबाकू उत्पादक देशों में शामिल है. खासकर आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना, उड़ीसा और गुजरात जैसे राज्यों में इसकी खेती बड़े पैमाने पर की जाती है. वित्त वर्ष 2024 के दौरान तंबाकू निर्यात से देश को हजारों करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा प्राप्त हुई थी. हालांकि, इसके उत्पादन और व्यापार को सख्त नियमों के तहत नियंत्रित किया जाता है. तंबाकू मुख्य रूप से ठंड वाली फसल मानी जाती है. इसकी खेती शुरू करने से पहले किसानों को खेत और किस्म का चयन करना पड़ता है. अच्छी गुणवत्ता वाली फसल के लिए मिट्टी, तापमान, सिंचाई और उर्वरक प्रबंधन का विशेष ध्यान रखा जाता है. किसान पहले पौध तैयार करते हैं, फिर उन्हें खेत में निश्चित दूरी पर रोपते हैं. रोपाई के बाद नियमित सिंचाई और खाद दी जाती है. फसल को तैयार होने में आम तौर पर तीन से चार महीने का समय लगता है. जब पत्तियां पक जाती है तो सिंचाई रोक दी जाती है, जिससे पत्तियां धीरे-धीरे सूखने लगती है. इसके बाद पत्तियों की तुड़ाई कर उन्हें अलग किया जाता है और बिक्री के लिए भेजा जाता है.

तंबाकू की खेती के लिए क्यों जरूरी है लाइसेंस?

भारत में तंबाकू की खेती और व्यापार को नियंत्रित करने के लिए तंबाकू बोर्ड अधिनियम 1975 लागू है. इसके तहत विशेष रूप से वर्जीनिया तंबाकू की खेती करने वाले किसानों को रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य है, जो किसान व्यावसायिक स्तर पर तंबाकू उगाना चाहते हैं उन्हें उत्पादक के रूप में पंजीकरण प्रमाण पत्र लेना पड़ता है. इसके अलावा तंबाकू को सुखाने के लिए इस्तेमाल होने वाले बार्न के संचालन हेतु भी अलग लाइसेंस की आवश्यकता होती है. हाल ही में सरकार ने कारोबार में आसानी को बढ़ावा देने के लिए इन लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन की वैधता अवधि 1 वर्ष से बढ़ाकर 3 वर्ष कर दी है. इस फैसले के बाद आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना और उड़ीसा के हजारों किसानों और बार्न संचालकों को राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि अब उन्हें हर साल नवीनीकरण की प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा.

ये भी पढ़ें-बारिश के सीजन में खाली पड़ी जमीन पर करें इस फसल की खेती, कुछ ही दिन में होगी तगड़ी कमाई

तंबाकू उत्पादन के लिए कौन-कौन से लाइसेंस जरूरी?

तंबाकू के बिजनेस में अलग-अलग स्तर पर काम करने वालों के लिए अलग-अलग प्रकार के लाइसेंस निर्धारित किए गए हैं. तंबाकू उगाने वाले किसानों के लिए उत्पादक पंजीकरण, प्रसंस्करण और पैकेजिंग करने वाली इकाइयों के लिए प्रोसेसर लाइसेंस, निर्यात और आयात करने वाली कंपनियों के लिए तंबाकू बोर्ड और संबंधित एजेंसियों की मंजूरी और थोक विक्रेताओं और वितरकों के लिए राज्य स्तर के व्यापार लाइसेंस, खुदरा दुकानदारों के लिए स्थानीय निकाय या राज्य सरकार की ओर से जारी विक्रेता लाइसेंस जरूरी होते हैं.

ये भी पढ़ें-Eucalyptus Tree: क्या यूकेलिप्टस सच में है किसानों का दुश्मन? जानिए इसकी खेती का कड़वा सच..



Source link

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments