Pigeon Pea Cultivation Tips: अरहर की खेती भारत के किसानों के लिए हमेशा से एक प्रॉफिटेबल बिजनेस रहा है. लेकिन पुराने तरीकों को बदलने का वक्त आ गया है. अब इस खेती से किसान अपनी इनकम में जबरदस्त इजाफा कर सकते हैं. आज के दौर में जब क्लाइमेट चेंज और कम होते रिसोर्सेज की चुनौती सामने है. तब खेती की इस तकनीक को अपनाना बेहद जरूरी हो गया है.
इसके मुताबिक अरहर बोने के पैटर्न और टाइमिंग में मामूली सा बदलाव करके न सिर्फ सॉइल हेल्थ सुधारी जा सकती है. बल्कि प्रोडक्शन को भी नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया जा सकता है. यह तकनीक उन किसानों के लिए मुनाफे वाली साबित हो रही है जो पुराने ढर्रे से हटकर कुछ नया और ज्यादा मुनाफे वाला करना चाहते हैं. आप भी जान लें पूरा तरीका.
ऐसे करें अरहर की खेती
इस नई तकनीक के तहत अरहर की बुवाई के लिए पौधों की दूरी और लाइनों के बीच के गैप पर विशेष ध्यान देना होता है. पहले किसान बीजों को काफी पास-पास बोते थे. जिससे पौधों को पर्याप्त न्यूट्रिशन और सनलाइट नहीं मिल पाती थी. रिसर्च बताती है कि अगर अरहर को बेड प्लांटिंग या चौड़ी कतारों में लगाया जाए. तो पौधों की जड़ों का विकास बेहतर होता है.
- बुवाई के समय मिट्टी की नमी का ध्यान रखना और हाई-क्वालिटी बीजों का सिलेक्शन करना सबसे अहम है.
- सिंचाई के लिए ड्रिप सिस्टम का यूज और समय पर निराई-गुड़ाई करने से फसल को बीमारियों से बचाया जा सकता है.
इंटर-क्रॉपिंग यानी अरहर के साथ दूसरी छोटी फसलें उगाकर किसान अपनी जमीन का मैक्सिमम यूज कर सकते हैं. जिससे लागत कम और प्रॉफिट ज्यादा होता है.
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20 गुना ज्यादा तक होगी फसल
अरहर की बुवाई के तरीके में किए गए इस मामूली से बदलाव की वजह से अरहर की पैदावार में 20 परसेंट तक की सीधी बढ़ोतरी देखी गई है. यह कोई छोटा आंकड़ा नहीं है. क्योंकि इससे किसानों की नेट सेविंग्स काफी बढ़ जाती है. सही स्पेसिंग और मैनेजमेंट से पौधों में फलियों की संख्या बढ़ती है और दानों की क्वालिटी भी बेहतर होती है.
- जब फसल को एयर और लाइट सही मात्रा में मिलती है, तो वह कीड़ों के हमले के प्रति ज्यादा रेजिस्टेंट बन जाती है.
- इस मॉडर्न तरीके को अपनाकर किसान न केवल अपनी फसल की क्वालिटी सुधार सकते हैं. बल्कि मार्केट में बेस्ट प्राइस भी ले सकते हैं.
यह 20 परसेंट का इजाफा खेती को एक घाटे के सौदे से निकालकर मुनाफे की ओर ले जाएगा.
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