Saturday, June 13, 2026
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मानसून आते ही बढ़ जाता है इन कीड़ों का खतरा, चट कर जाएंगे आपकी पूरी फसल


Crop Insects Safety Tips: देश के कई हिस्सों में इन दिनों जमकर बारिश हो रही है. जिससे भीषण गर्मी से राहत तो मिली है लेकिन इसके साथ ही खेती-किसानी में एक बड़ा सिरदर्द भी शुरू हो जाता है. जैसे ही हवा में नमी बढ़ती है. खेतों में नुकसानदेह कीड़े-मकोड़ों और फंगस का आतंक अचानक बहुत तेजी से बढ़ जाता है. इस सुहावने मौसम में अगर किसान भाइयों ने थोड़ी सी भी लापरवाही बरती.

तो ये साइलेंट किलर कीट देखते ही देखते हरी-भरी खड़ी फसल को पूरी तरह चट कर जाते हैं. मॉइस्चर और उमस की वजह से इन कीड़ों को पनपने और अंडे देने का सबसे मुफीद माहौल मिल जाता है. ऐसे में फसलों को इस बड़े खतरे से सुरक्षित रखने के लिए समय रहते सही उपाय और पुख्ता इंतजाम करना बेहद जरूरी हो जाता है जिससे सीजन की मेहनत बेकार न जाए.

इन कीड़ों से रहता है सबसे ज्यादा खतरा

देश के कई हिस्सों में इन दिनों जमकर बारिश हो रही है. जिसके चलते फसलों पर मुख्य रूप से तना छेदक, फल छेदक, एफिड्स, थ्रिप्स और सफेद मक्खी जैसे खतरनाक कीड़ों का हमला सबसे ज्यादा देखने को मिलता है. ये कीड़े पौधों के कोमल पत्तों, तनों और फूलों का रस चूसकर उन्हें अंदर से बिल्कुल खोखला और कमजोर बना देते हैं. जिससे पौधों का विकास पूरी तरह रुक जाता है. 

इसके अलावा लगातार होने वाली बारिश के कारण खेतों में जलजमाव हो जाता है. जिससे पौधों की जड़ों में सड़न और कई तरह के फंगल इन्फेक्शन का खतरा भी कई गुना बढ़ जाता है. अगर आपको अपनी फसल के पत्ते पीले पड़ते, मुड़ते या कटे हुए दिखाई दें. तो तुरंत समझ जाएं कि कीड़ों ने अपना काम शुरू कर दिया है.

यह भी पढ़ें: एक खेत में 12 फसलें, फिर भी कम खर्च! क्या है पहाड़ों की बारहनाजा खेती?

फसलों को बचाने के लिए करें यह काम

अपनी फसलों को कीड़ों के इस तगड़े हमले से बचाने के लिए किसानों को खेतों की नियमित निगरानी करनी चाहिए और जलनिकासी का बेहतरीन इंतजाम रखना चाहिए जिससे पानी जमा न हो. कीड़ों को शुरुआती स्टेज में ही रोकने के लिए खेतों में लाइट ट्रैप, फेरोमोन ट्रैप और यलो स्टिकी कार्ड्स का इस्तेमाल करना सबसे बेस्ट और सस्ता तरीका है.  जो इन उड़ने वाले कीटों को अपनी तरफ खींचकर खत्म कर देते हैं. 

इसके साथ ही शुरुआत में ही रासायनिक दवाओं के पीछे भागने के बजाय नीम के तेल का छिड़काव करना एक बेहतरीन और पर्यावरण के अनुकूल ऑप्शन है. अगर प्रकोप बहुत ज्यादा बढ़ जाए. तभी कृषि वैज्ञानिकों की सलाह लेकर सही मात्रा में कीटनाशकों का इस्तेमाल करें.

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