Wednesday, February 25, 2026
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From Japan angle to Gandhi absence in first 15 August celebrations 10 points क्यों चुनी 15 अगस्त की डेट, आजादी के जश्न में क्यों नहीं थे महात्मा गांधी, स्वतंत्रता दिवस की 10 दिलचस्प बातें, करियर न्यूज़


Independence Day Interesting Facts : 15 अगस्त का दिन पूरे भारत में स्वतंत्रता दिवस ( Independence Day of India ) के रूप में मनाया जाता है। सन् 1947 में इसी दिन भारत को ब्रिटिश हुकूमत से आजादी मिली थी। अंग्रेजों से भारत को आजादी दिलाने में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की अहम भूमिका रही थी। लेकिन क्या आपको इस बात की जानकारी है कि जब भारत को आजादी मिली थी तो महात्मा गांधी इस जश्न में नहीं थे। तब वे दिल्ली से हजारों किलोमीटर दूर बंगाल के नोआखली में थे, जहां वे हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच हो रही सांप्रदायिक हिंसा को रोकने के लिए अनशन कर रहे थे। एक दिलचस्प तथ्य यह भी है कि भारत को आजाद करने के लिए किसने और क्यों 15 अगस्त की तिथि को चुना। इसके पीछे क्या वजह थी। आजादी की सालगिरह के मौके पर यहां जानें इस यादगार दिन से जुड़े कुछ दिलचस्प तथ्य – 

1. आजादी के लिए 15 अगस्त की डेट क्यों चुनी

भारत के आखिरी वायसरॉय लार्ड माउंटबेटन ने भारत की स्‍वतंत्रता के लिए 15 अगस्‍त का दिन तय किया था। दरअसल हिंदुस्तान के स्वतंत्रता सेनानियों के कई वर्षों के कड़े संघर्ष के बाद ब्रिटिश संसद ने भारत को आजाद करने का फैसला किया था। संसद ने लॉर्ड माउंटबेटन (Lord Mountbatten) को 30 जून 1948 को भारत को सत्ता सौंपने का जिम्मा दिया था। लेकिन माउंटबेटन ने महीनों पहले भारत को आजाद करने का फैसला किया। इसके लिए 15 अगस्त 1947 का दिन चुना क्योंकि वे नहीं चाहते थे कि और ज्यादा दंगे और खूनखराबा हो। माउंटबेटन ने भारत की आजादी के लिए 15 अगस्त का दिन इसलिए चुना क्योंकि दो साल पहले जापान ने इसी दिन दूसरे विश्व युद्ध में हथियार डाले थे। 15 अगस्त 1947 का दिन जापान के आत्मसमर्पण की दूसरी वर्षगांठ था।

15 अगस्त, 1947 को लॉर्ड माउंटबेटन ने अपने दफ़्तर में काम किया। दोपहर में नेहरू ने उन्हें अपने मंत्रिमंडल की सूची सौंपी और बाद में इंडिया गेट के पास प्रिसेंज गार्डेन में एक सभा को संबोधित किया।

2. गांधी आजादी के जश्न में क्यों नहीं थे

आजादी की निश्चित तिथि से दो सप्ताह पहले ही गांधीजी ने दिल्ली को छोड़ दिया था। उन्होंने चार दिन कश्मीर में बिताए और उसके बाद ट्रेन से वह कोलकाता की ओर रवाना हो गए, जहां साल भर से चला रहा दंगा खत्म नहीं हुआ था।

3.  15 अगस्त 1947, को जब भारत को आजादी मिली थी तब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी इस जश्न में शामिल नहीं हो सके थे, क्योंकि तब वे दिल्ली से हजारों किलोमीटर दूर बंगाल के नोआखली में थे, जहां वे हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच हो रही सांप्रदायिक हिंसा को रोकने के लिए अनशन कर रहे थे। गांधीजी ने 15 अगस्त 1947 का दिन 24 घंटे का उपवास करके मनाया था। उस वक्त देश को आजादी तो मिली थी लेकिन इसके साथ ही मुल्क का बंटवारी भी हो गया था। पिछले कुछ महीनों से देश में लगातार हिंदू और मुसलमानों के बीच दंगे हो रहे थे। इस अशांत माहौल से गांधीजी काफी दुखी थे।

4. 14 अगस्त की मध्यरात्रि को जवाहर लाल नेहरू ने अपना ऐतिहासिक भाषण ‘ट्रिस्ट विद डेस्टनी’ दिया था। इस भाषण को पूरी दुनिया ने सुना था लेकिन महात्मा गांधी ने इसे नहीं सुना क्योंकि उस दिन वे जल्दी सोने चले गए थे।

5. 15 अगस्त तक भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा रेखा का निर्धारण नहीं हुआ था। इसका फैसला 17 अगस्त को रेडक्लिफ लाइन की घोषणा से हुआ जोकि भारत और पाकिस्तान की सीमाअओं को निर्धारित करती थी।

6. भारत के पहले ध्वज में थे – लाल , पीला और हरा रंग

भारत के राष्ट्रीय ध्वज की कल्पना साल 1906 में की गई थी। भारत का पहला गैर आधिकारिक ध्वज 7 अगस्त 1906 को कोलकाता के पास बागान चौक में कांग्रेस के अधिवेशन में फहराया गया था। यह ध्वज स्वामी विवेकानंद की शिष्या भगिनी निवेदिता द्वारा तैयार किया गया था। इस ध्वज में हरे, पीले व लाल रंग की तीन आड़ी पट्टियां थीं।

7. भारत 15 अगस्त को आजाद जरूर हो गया लेकिन उस समय उसका अपना कोई राष्ट्र गान नहीं था। हालांकि रवींद्रनाथ टैगोर ‘जन-गण-मन’ 1911 में ही लिख चुके थे, लेकिन यह राष्ट्रगान 1950 में ही बन पाया।

8. 15 अगस्त कई अन्य देशों का स्वतंत्रता दिवस

15 अगस्त को भारत के अलावा कुछ अन्य देशों का भी स्वतंत्रता दिवस होता है। दक्षिण कोरिया जापान से 15 अगस्त, 1945 को आज़ाद हुआ। ब्रिटेन से बहरीन 15 अगस्त, 1971 को और फ्रांस से कांगो 15 अगस्त, 1960 को आजाद हुआ था। लिकटेंस्टीन पर जर्मनी का कब्‍जा था। 15 अगस्त 1866 को लिकटेंस्टीन ने जर्मनी की दासता से मुक्ति हासिल की थी। लिकटेंस्टीन 1940 से 15 अगस्त को अपने स्वतंत्रता दिवस के तौर पर मना रहा है।

9. 16 अगस्त, 1947 को लाल किले से झंडा

हर साल स्वतंत्रता दिवस पर भारत के प्रधानमंत्री लाल किले से झंडा फहराते हैं, लेकिन 15 अगस्त, 1947 को ऐसा नहीं हुआ था। लोकसभा सचिवालय के एक शोध पत्र के मुताबिक नेहरू ने 16 अगस्त, 1947 को लाल किले से झंडा फहराया था। 

भारतीय डाक विभाग द्वारा कई डाक संग्रहण प्रतियोगिताओं में निर्णायक की भूमिका अदा कर चुके कोलकाता निवासी शेखर चक्रवर्ती ने अपने संस्मरणों फ्लैग्स एंड स्टैम्प्स में लिखा है कि 15 अगस्त 1947 के दिन वायसराइल लॉज (अब राष्ट्रपति भवन ) में जब नई सरकार को शपथ दिलाई जा रही थी, तो लॉज के सेंट्रल डोम पर सुबह साढ़े दस बजे आजाद भारत का राष्ट्रीय ध्वज पहली बार फहराया गया था। उन्होंने बताया कि इससे पूर्व 14-15 अगस्त की रात को स्वतंत्र भारत का राष्ट्रीय ध्वज कौंसिल हाउस के उपर फहराया गया, जिसे आज संसद भवन के रूप में जाना जाता है। 15 अगस्त 1947 को सुबह छह बजे की बात है। देश के इतिहास में पहली बार राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दिए जाने का कार्यक्रम था। इस कार्यक्रम में पहले समारोहपूर्वक यूनियन जैक को उतारा जाना था, लेकिन जब देश के अंतिम वायसराय लार्ड माउंटबेटन ने पंडित नेहरू के साथ इस पर विचार विमर्श किया, तो उन्होंने इस बात पर सहमति जताई कि यह ऐसा दिन है जब हर कोई खुशी चाहता है, लेकिन यूनियन जैक को उतारे जाने से ब्रिटेन की भावनाओं के आहत होने के अंदेशे के चलते उन्होंने समारोह से इस कार्यक्रम को हटाने की बात कही। इससे पहले 14 अगस्त 1947 की शाम को ही वायसराय हाउस के उपर से यूनियन जैक को उतार लिया गया था

10. 15 अगस्त 1947 को, 1 रुपया 1 डॉलर के बराबर था और सोने का भाव 88 रुपए 62 पैसे प्रति 10 ग्राम था। 



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