Tuesday, April 14, 2026
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उत्तर प्रदेश में सुपरफूड की एंट्री, पैशन फ्रूट की खेती शुरू कर कमाएं लाखों रुपये


Passion Fruit Cultivation Tips: उत्तर प्रदेश के पारंपरिक खेतों में अब कुछ ऐसा उग रहा है. जिसकी कल्पना शायद ही किसी ने की होगी. अमेरिका और ब्राजील जैसे देशों में पाया जाने वाला पैशन फ्रूट अब यूपी की मिट्टी में अपनी जड़ें जमा चुका है. यह फल न केवल स्वाद में लाजवाब है. बल्कि इसका इस्तेमाल जूस और जेली बनाने में भी खूब होता है. यूपी में इसकी शुरुआत एक ऐसे समय में हुई है जब किसान पारंपरिक फसलों के नुकसान से तंग आकर कुछ नया और हटके करने की तलाश में हैं. जान लीजिए कैसे आप भी कर सकते हैं पैशन फ्रूट की खेती.

बड़े शहरों रहती है डिमांड

फिलहाल उत्तर प्रदेश के लोकल बाजारों के लिए पैशन फ्रूट एक नई चीज है. लेकिन दिल्ली जैसे महानगरों में इसकी डिमांड और कीमत दोनों आसमान छू रहे हैं. बड़े शहरों के सुपरमार्केट में यह फल 170 रुपये से लेकर 220 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है. जो किसानों के लिए बंपर मुनाफे का संकेत है. जैसे-जैसे लोगों को इस सुपरफूड के फायदों का पता चलेगा. यूपी के बाजारों में भी इसकी मांग तेजी से बढ़ेगी.

  • दिल्ली और बड़े शहरों में पैशन फ्रूट ₹200 प्रति किलो के आसपास बिकता है, जिससे यह एक हाई-वैल्यू कैश क्रॉप बन जाती है.
  • इसकी डिमांड केवल फल के रूप में ही नहीं, बल्कि जूस और जेली बनाने वाली कंपनियों में भी बहुत ज्यादा है.

एक बार मार्केट सेट हो जाए. तो यह विदेशी फल छोटे किसानों को भी घर बैठे लखपति बनाने की ताकत रखता है.

यह भी पढ़ें: खेत में उगाएं ‘लाल-पीली’ शिमला मिर्च और कमाएं मोटा मुनाफा, मार्केट में डिमांड देख किसान हुए गदगद

कैसे करें इसकी खेती?

पैशन फ्रूट की सबसे अच्छी बात यह है कि इसे किसी बहुत खास या बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती. यह एक बेल वाली फसल है. जिसे चढ़ाने के लिए खेत में एक मजबूत ढांचा या स्ट्रक्चर बनाना पड़ता है. इसके 100 पौधों के लिए करीब सात क्विंटल लोहे के एंगल और दो क्विंटल तार का इस्तेमाल कर एक जाल तैयार कर सकते है. सितंबर के आखिर से इसमें फूल आने लगते हैं और फरवरी से लेकर जून तक फलों की तुड़ाई का सिलसिला चलता रहता है.

  • फसल साल में एक बार मुख्य रूप से आती है. लेकिन इसकी हार्वेस्टिंग का सीजन लगभग तीन महीने तक चलता है.
  • बेलों के नीचे की खाली जगह का इस्तेमाल किसान शिमला मिर्च, मक्का या पत्तागोभी उगाने के लिए कर सकते हैं, जिसे मल्टीलेयर फार्मिंग कहते हैं.

बिना किसी बड़ी बीमारी या कीड़ों के डर के यह फसल कम मेहनत में तैयार होने वाला एक बेहतरीन ऑप्शन साबित हो रही है.

यह भी पढ़ें: लीची की पैदावार को बर्बाद कर सकते हैं ये खतरनाक कीट, जानिए कृषि विशेषज्ञों के बचाव के तरीके



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