Wardha-Kuno Rivers: भारत एक ऐसा देश है जहां आधे से ज्यादा लोग खेती-किसानी से अपनी रोजी-रोटी चलाते हैं. लेकिन पानी की कमी हमेशा एक बड़ा सिरदर्द रही है. ऐसे माहौल में वर्धा और कूनो जैसी नदियां किसानों के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं लग रही हैं. इन नदियों के बहाव ने उन इलाकों की भी तस्वीर बदल दी है जिन्हें कभी सूखा और बंजर मानकर छोड़ दिया गया था. स्मार्ट जल प्रबंधन और चेक डैम जैसी नई तकनीकों के जरिए पानी को रोककर सीधा खेतों तक पहुंचाया गया है.
इससे न सिर्फ मिट्टी की प्यास बुझी है बल्कि फसलों की पैदावार में भी भारी बढ़ोतरी हुई है. सिंचाई के इन बेहतर इंतजामों ने न केवल खेती का तरीका बदला है. बल्कि किसानों के जीने के स्तर को भी एक नई ऊंचाई दी है. आज ये नदियां सिर्फ पानी का जरिया नहीं बल्कि लाखों परिवारों की खुशहाली का सबसे बड़ा सहारा बन गई हैं.
वर्धा नदी विदर्भ के खेतों में लेकर आई हरियाली
विदर्भ जैसे मुश्किल इलाके में वर्धा नदी वहां के किसानों के लिए असली लाइफलाइन बनकर उभरी है. महाराष्ट्र के वर्धा जिले में इस नदी पर बने चेक डैम ने एक ऐसी क्रांति ला दी है. जिसने तपती गर्मियों में भी पानी की किल्लत को खत्म कर दिया है. पहले जहां किसान पानी न होने की वजह से साल में सिर्फ एक ही फसल ले पाते थे.
वहीं अब वे दो से तीन फसलें बड़े आराम से काट रहे हैं. इसका सीधा असर किसानों की जेब पर पड़ा है और उनकी कमाई काफी बढ़ गई है. धमन जैसी सहायक नदी के पुनरुद्धार ने करीब 2000 हेक्टेयर जमीन को हरा-भरा कर दिया है. जिससे अब सोयाबीन, कपास और गेहूं जैसी फसलें उस बंजर मिट्टी में भी शानदार तरीके से लहलहा रही हैं.
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कूनो नदी ने इन किसानों को पहुंचाया फायदा
वहीं मध्य प्रदेश की कूनो नदी आज श्योपुर, शिवपुरी और मुरैना जैसे जिलों के लिए किसी संजीवनी बूटी की तरह काम कर रही है. कूनो नेशनल पार्क के बीच से बहने वाली यह नदी न सिर्फ जंगल के जानवरों को जीवन दे रही है. बल्कि इसके आसपास की सूखी जमीन को भी उपजाऊ बना रही है.
नदी पर बन रहे नए बांधों और एनीकट की मदद से करीब 1.50 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई के दायरे में लाने का टारगेट है. जो इस पूरे इलाके की किस्मत बदल कर रख देगा. अब साल भर पानी मिलने की वजह से उन सूखे इलाकों में भी खेती मुमकिन हो पा रही है. जहां पहले घास का एक तिनका उगाना भी बहुत बड़ी चुनौती माना जाता था.
मार्डन तकनीकों से बदली किस्मत
वर्धा और कूनो जैसी नदियों के पानी का सही इस्तेमाल ही वह वजह है जिसने बंजर जमीन में जान फूंकी है. जल संरक्षण की लेटेस्ट तकनीकों और पानी रोकने के स्ट्रक्चर्स ने मिट्टी की नमी को बनाए रखने में जबरदस्त मदद की है. जिससे फसलों के पैटर्न में भी बड़ा सुधार आया है.
चंबल की सहायक कूनो और गोदावरी की सहायक वर्धा नदियों ने यह साबित कर दिया है कि अगर नेचुरल रिसोर्सेज का सही मैनेजमेंट किया जाए. तो खेती को कभी न खत्म होने वाला मुनाफे का सौदा बनाया जा सकता है.
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