
बरसात के दिनों में सब्जियों के खेतों में सबसे बड़ी समस्या पानी भरने की होती है. अगर खेत में पानी जमा रहा तो पौधों की जड़ें गलने लगती हैं. इसलिए बारिश शुरू होने से पहले ही खेत के चारों तरफ नाली बनाकर पानी निकलने का रास्ता साफ कर लें जिससे फालतू पानी आसानी से बाहर निकल सके.

बारिश के मौसम में मिट्टी की नमी की वजह से फंगस और बैक्टीरिया बहुत तेजी से फैलते हैं. इस नुकसान से पौधों को बचाने के लिए खेत में बेंटोनाइट सल्फर का प्रयोग जरूर करें. यह न सिर्फ फंगल बीमारियों को रोकता है. बल्कि मिट्टी में सल्फर की कमी पूरी करके सब्जियों का रंग, साइज और क्वालिटी भी बेहतर बनाता है.

बरसात में पारंपरिक बोरी वाली डीएपी देने पर वह बारिश के पानी के साथ बह जाती है. जिससे खाद की बर्बादी होती है. इसके बजाय पत्तियों पर नैनो डीएपी का छिड़काव करें. यह पौधों में तुरंत असर दिखाता है जड़ों को मजबूती देता है और बारिश में बहता भी नहीं है जिससे पौधों को पूरा पोषण मिल जाता है.

टमाटर, खीरा, करेला और लौकी जैसी बेल वाली सब्जियों को सीधे जमीन पर न फैलने दें. बारिश के पानी के संपर्क में आते ही जमीन पर मौजूद सब्जियां सड़ने लगती हैं. बांस और तार के सहारे मचान बनाकर पौधों को ऊपर चढ़ाएं, ताकि हवा और धूप सही से मिले और फसल पूरी तरह सुरक्षित और साफ-सुथरी रहे.

बारिश के मौसम में सब्जियों के आसपास खरपतवार बहुत तेजी से उगते हैं. जो कीटों और बीमारियों का घर बनते हैं. समय-समय पर निराई-गुड़ाई करते रहें और अगर किसी पौधे में बीमारी के शुरुआती लक्षण दिखें. तो उसे तुरंत खेत से हटा दें जिससे संक्रमण बाकी की स्वस्थ फसल में न फैलने पाए.

बरसात में थोड़ी सी लापरवाही भी पूरे सीजन की कमाई पर पानी फेर सकती है. जल निकासी, बेंटोनाइट सल्फर और नैनो डीएपी जैसे यह आसान और असरदार उपाय अपनाकर आप अपनी सब्जियों को नुकसान से बचा सकते हैं. सही देखभाल और मैनेजमेंट से आपकी फसल हरी-भरी रहेगी और मार्केट में आपको बेहतरीन दाम मिलेंगे.
Published at : 22 Jul 2026 05:20 PM (IST)


