Friday, July 24, 2026
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दीदी से नहीं दिखाई ममता, BJP की बढ़ाई क्षमता; बंगाल के दलित बहुल इलाकों ने कैसे पलटा गेम, National Hindi News


पश्चिम बंगाल की दलित बहुल सीटों पर भाजपा ने बंपर जीत हासिल की है। इसके अलावा जनजाति बहुल इलाकों में भी अच्छी सफलता पाई है। आंकड़ों के मुताबिक टीएमसी इन सीटों पर बुरी तरह पिछड़ी है। ऐसा सामाजिक समीकरण ममता बनर्जी को आने वाले समय में काफी परेशान करेगा।

ममता बनर्जी की 15 साल पुरानी बंगाल की सत्ता चली गई है। यह सत्ता संघर्ष इतना टाइट फाइट वाला था कि ममता बनर्जी ने हार के बाद भी सीएम पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया। अब राज्यपाल के द्वारा उन्हें बर्खास्त किया जाना ही एक रास्ता बचा है। इस बीच जानकार आंकड़ों का विश्लेषण करने में जुटे हैं कि आखिर कैसे भाजपा को इतनी बड़ी जीत मिली है और टीएमसी कैसे चूक गई। इसका एक जवाब अनुसूचित जाति बहुल इलाकों के वोटिंग पैटर्न से भी मिल रहा है। आंकड़ों के मुताबिक जिन सीटों पर 30 फीसदी से ज्यादा अनुसूचित जाति के लोगों की आबादी है, वहां की 82.7 फीसदी सीटों पर भाजपा को जीत मिली है।

भाजपा ने दलित बहुल 72 सीटों पर जीत हासिल की है, जबकि टीएमसी को 15 सीटें ही मिली है। वहीं 20 से 30 फीसदी की दलित आबादी वाली 69 फीसदी सीटों पर भाजपा को जीत मिली है। अब यदि दलितों की 10 फीसदी से कम आबादी वाली सीटों की बात करें तो यहां भाजपा की जीत का आंकड़ा 56 फीसदी ही है। टीएमसी यहां 33 पर्सेंट सीटें जीती है। इस तरह भाजपा ने अनुसूचित जाति बहुल सीटों पर बड़ी सफलता हासिल की है। आंकड़ों में स्पष्ट दिखा है कि जिन इलाकों में दलितों की आबादी अधिक है, वहां भाजपा की जीत का प्रतिशत बढ़ता चला गया है।

बंगाल की राजनीति में यह बड़ा बदलाव है। अब तक भाजपा को बंगाल ही नहीं बल्कि देश भर में सवर्णों और अन्य वर्गों की राजनीति करने वाला दल माना जाता था। 2014 के बाद से भाजपा विस्तार ओबीसी और दलितों के बीच भू खूब हुआ है, लेकिन बंगाल चुनाव ने इसे नई ऊंचाई दी है। माना जा रहा है कि हिंदू एकता की भाजपा की कोशिशें सफल हुई हैं। इसी के चलते उसे हिंदू समाज के ज्यादातर वर्गों का समर्थन हासिल हुआ है। यदि यह ट्रेंड लंबा चला तो फिर बंगाल में ममता बनर्जी के भविष्य के लिए भी खराब संकेत होंगे। कुछ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि भाजपा ने ममता बनर्जी की लेबलिंग मुस्लिम तुष्टिकरण करने वाली नेता के तौर पर की है और उसका असर दिख रहा है।

बंगाल के गांवों तक में भाजपा की पैठ, ममता के लिए बड़ा खतरा

यही कारण है कि अब तक शहरी इलाकों में ही सीटें जीतने वाली भाजपा ने बंगाल के गांवों तक में पैठ बनाई है। यहां तक कि जनजाति बहुल इलाकों में भी भाजपा को अच्छी सीटें मिली हैं। 20 फीसदी से ज्यादा एसटी आबादी वाली सीटों पर भाजपा की जीत का आंकड़ा 96 फीसदी है। उसने यहां से 25 सीटें पाई हैं। वहीं टीएमसी के खाते में सिर्फ एक सीट गई है। बता दें कि जिस झारग्राम में पीएम नरेंद्र मोदी ने झालमुड़ी खाई थी, वह भी अनुसूचित जनजाति बहुल ही है। इससे स्पष्ट होता है कि भाजपा ने किस तरह अपने वोटरों का सामाजिक बेस बढ़ाया है।



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