Ladli Behna Yojana and PM KISAN Scheme: मध्य प्रदेश राज्य सरकार की सबसे चर्चित योजनाओं में से एक मुख्यमंत्री लाडली बहन योजना की 35वीं किस्त 12 अप्रैल को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने डीबीटी के माध्यम से 1.25 करोड़ बहनों के खाते में ट्रांसफर कर दी है. मध्य प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री लाडली बहन योजना और केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री किसान निधि योजना की चर्चा होती रहती है. यह दोनों ही योजना आम जनता को आर्थिक मदद देने वाली बड़ी योजनाएं हैं.
ऐसे में कई बार लोगों के मन में सवाल उठते रहते हैं कि क्या इन दोनों योजनाओं का लाभ एक साथ ले सकते हैं या नहीं. इसे लेकर नियमों को समझना जरूरी है, क्योंकि दोनों योजनाएं अलग-अलग कैटेगरी के लाभार्थियों के लिए बनाई गई है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि क्या लाडली बहन योजना के साथ एमपी की महिलाएं किसान निधि का पैसा भी ले सकती है और इसे लेकर क्या नियम बने हुए हैं.
लाडली बहन योजना क्या है और किन्हें मिलता है इसका लाभ
लाडली बहन योजना मध्य प्रदेश राज्य सरकार की एक प्रमुख योजना है, जिसके तहत राज्य की महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये दिए जाते हैं. यह पैसा सीधे डीबीटी के जरिए उनके बैंक खाते में ट्रांसफर होता है. इस योजना का लाभ 21 से 60 साल की विवाहित महिलाओं, विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्ता सहित सभी महिलाओं को मिलता है. जिनके परिवार की सालाना आय 2.5 लाख रुपये से कम है.
क्या है प्रधानमंत्री किसान निधि योजना?
प्रधानमंत्री किसान निधि योजना केंद्र सरकार की योजना है, जिसके तहत किसानों को सालाना 6000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है. यह राशि तीन किस्तों में सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है. इस योजना का लाभ उन किसानों को मिलता है, जिनके नाम पर खेती योग्य जमीन होती है और वह जरूरी शर्तें पूरी करते हैं.
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क्या महिलाएं किसान दोनों योजनाओं का ले सकती है लाभ?
अगर कोई महिला मध्य प्रदेश की निवासी है और वह लाडली बहन योजना की पात्रता पूरी करती है. साथ ही उसके नाम पर खेती की जमीन भी है और वह पीएम किसान निधि योजना के नियमों में फिट बैठती है तो वह दोनों योजनाओं का लाभ ले सकती है. यानी दोनों योजनाओं के लाभार्थी अलग-अलग मानदंडों पर तय होते हैं. इसलिए पात्रता पूरी होने पर किसी तरह की रोक नहीं है.
किन मामलों में रुक सकता है पैसा?
हालांकि पीएम किसान योजना में कई किसानों को अगली किस्त नहीं मिलती है. इसकी बड़ी वजह यह होती है कि उन्होंने ई-केवाईसी या भू-सत्यापन जैसे जरूरी काम पूरे नहीं किए होते हैं. ऐसे में महिला किसानों को दोनों योजनाओं का लाभ पाने के लिए सभी जरूरी प्रक्रिया समय पर पूरी करनी जरूरी होती है.
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