Sorghum Fodder Farming: पहले गेहूं की कटाई के बाद किसान अक्सर खेत खाली छोड़ देते हैं, लेकिन अब किसान इस समय का बेहतर इस्तेमाल कर रहे हैं. बदलते खेती के तरीके के बीच गेहूं के बाद कई तरह की ऐसी खेती की जा रही है, जो किसानों के लिए आसान और फायदेमंद बनकर सामने आई है. गेहूं की कटाई के बाद खेती का यह तरीका न सिर्फ खेत को खाली नहीं रहने देता, बल्कि पशुपालन और खेती दोनों में फायदा देता है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि गेहूं काट लिया तो अब किसान किस चीज की खेती करें तो तगड़ी कमाई होगी हो जाएगी.
कम समय में तैयार होने वाली खेती करें
गेहूं काट लिया तो अब किसान गेहूं के बाद ज्वार की चरी की खेती कर सकते हैं. ज्वार की चरी तेजी से बढ़ने वाली फसल है, जो बुवाई के करीब 40 से 50 दिनों में तैयार हो जाती है. गर्मियों में जब हरे चारे की कमी होती है तो उस समय यह फसल पशुओं के लिए ज्यादा और पौष्टिक चारा उपलब्ध कराती है. इससे पशुओं का पोषण बेहतर होता है और दूध उत्पादन में भी बढ़ोतरी देखने को मिलती है.
कम लागत में फायदे का सौदा
इस फसल की सबसे बड़ी खासियत इसकी कम लागत है. गेहूं की कटाई के बाद खेत में बची नमी के कारण इसकी बुवाई आसान हो जाती है और ज्यादा खर्चा नहीं आता है. ज्वार की चरी उगाने से किसानों को बाजार से महंगा चार खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती है. जिससे पशुपालन का खर्च कम हो जाता है. इसके अलावा ज्वार की चरी की खेती में एक बार बुवाई करने के बाद कई बार कटाई की जा सकती है. पहली कटाई करीब 50 से 60 दिनों में होती है. इसके बाद 30 से 35 दिनों में फसल फिर से तैयार हो जाती है. इससे लंबे समय तक हरे चारे की उपलब्धता बनी रहती है और पशुपालकों को लगातार फायदा मिलता है.
मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहती है
ज्वार की खेती सिर्फ चारा ही नहीं देती, बल्कि खेत की मिट्टी की सेहत को भी बेहतर बनाए रखती है. यह फसल भूमि की उर्वरता को बनाए रखने में मदद करती है, जिससे अगली फसल के लिए खेत तैयार रहता है और उत्पादन बेहतर मिलता है. गेहूं की कटाई के बाद खेत में बचे डंठल और भूसे को अब किसान बेकार नहीं छोड़ते. मशीनों की मदद से इसे चारे में बदलकर उपयोग किया जा रहा है, यह बाजार में बेचा जा रहा है. इससे फसल के साथ-साथ एक्स्ट्रा आमदनी भी होती है और पराली जलाने की समस्या भी कम होती हैं.
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