Summer Safety For Animals: बदलते मौसम का असर जितना इंसानी शरीर पर पड़ रहा है, उतना ही पेड़-पौधों और जानवरों पर भी साफ दिखाई दे रहा है. इसका कारण है कि, इस बार गर्मी समय से पहले ही तेज हो गई है और कई जगहों पर तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है. तेज धूप, लू और बढ़ती गर्मी का असर जहां पेड़ों के सूखते पत्तों और बदलते रंगों से आसानी से समझ आ जाता है, वहीं जानवरों में इस बदलाव को पहचानना थोड़ा मुश्किल हो जाता है, क्योंकि वे अपनी परेशानी बता नहीं सकते.
वहीं, गर्मियों में इंसानों की तरह जानवर भी हीट स्ट्रोक का शिकार हो सकते हैं. खासकर पालतू जानवर जैसे कुत्ते, बिल्ली, गाय-भैंस और यहां तक कि सड़क पर रहने वाले जानवर भी तेज गर्मी में जल्दी प्रभावित होते हैं. ऐसे में उनके व्यवहार और शारीरिक बदलावों पर ध्यान देना बहुत जरूरी हो जाता है.
जानवरों में हीट स्ट्रोक का खतरा और लक्षण
हीट स्ट्रोक के दौरान जानवरों में कुछ सामान्य लक्षण दिखाई देते हैं. जिसे नजरअंदाज करने से उनकी जान खतरे में हो सकती है. जैसे उनका तेज सांस लेना या हांफना, बहुत ज्यादा लार टपकना, सुस्ती या कमजोरी महसूस करना, खाना-पीना छोड़ देना और शरीर का तापमान बढ़ जाना. कई बार उनकी नाक और मुंह सूखने लगते हैं और वे बार-बार छांव या ठंडी जगह की तलाश करते हैं. कभी-कभी ऐसी गंभीर स्थिति में जानवर बेहोश भी हो सकते हैं, जो एक इमरजेंसी संकेत है.
सबसे बड़ी समस्या यह है कि जानवर अपनी तकलीफ को शब्दों में नहीं बता सकते, इसलिए उनकी छोटी-छोटी हरकतों को समझना जरूरी हो जाता है. जैसे अगर कोई कुत्ता लगातार जीभ बाहर निकालकर हांफ रहा है या कोई गाय बार-बार बैठने की कोशिश कर रही है, तो यह संकेत हो सकता है कि वह गर्मी से परेशान है.
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बचाव के आसान उपाय
ऐसे में जानवरों को हीट स्ट्रोक से बचाने के लिए कुछ आसान उपाय अपनाए जा सकते हैं. सबसे पहले, उनके लिए हमेशा छांव और ठंडी जगह उपलब्ध कराएं. घर के पालतू जानवरों को धूप में ज्यादा देर तक न रखें. उनके लिए समय- समय पर साफ और ठंडा पानी हमेशा उपलब्ध करें, ताकि वे डिहाइड्रेशन से बच सकें. वही अगर आप बाहर किसी जानवर को देखते हैं, तो उसके लिए पानी का इंतजाम करना भी एक अच्छा कदम हो सकता है. साथ ही यदि किसी जानवर में हीट स्ट्रोक के गंभीर लक्षण दिखें, तो तुरंत उसे ठंडी जगह पर ले जाएं और उसके शरीर पर हल्का पानी डालें. ध्यान रखें कि बहुत ठंडा पानी अचानक न डालें, इससे नुकसान भी हो सकता है. जरूरत पड़ने पर पशु चिकित्सक की मदद लेना सबसे सही रहेगा.
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